'भारत-जर्मनी की साझेदारी में नया ग्रीन हाइड्रोजन मेगा प्रोजेक्ट, गेम-चेंजर साबित होगा': पीएम मोदी

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"स्वामी विवेकानंद जयंती के दिन चांसलर मर्ज का भारत में स्वागत करना मेरे लिए विशेष प्रसन्नता का विषय है।"- प्रधानमंत्री

India, Germany sign Memorandum of Understandings to enhance bilateral cooperation

PM Modi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की मौजूदगी में भारत और जर्मनी के बीच हुए गेम चेंजर मेगा प्रोजेक्ट का उल्लेख किया। सोमवार को गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर कन्वेंशन एंड एग्जिबिशन सेंटर में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच हुए विभिन्न समझौतों की अहमियत को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर चांसलर मर्ज का भारत में स्वागत करना उनके लिए विशेष प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह एक सुखद संयोग है कि स्वामी विवेकानंद ने ही भारत और जर्मनी के बीच दर्शन, ज्ञान और आत्मिक संबंधों का सेतु स्थापित किया था। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि चांसलर मर्ज की यह यात्रा उसी सेतु को नई ऊर्जा, नया विश्वास और नया विस्तार प्रदान कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि चांसलर के रूप में यह उनकी न केवल भारत, बल्कि पूरे एशिया की पहली यात्रा है, जो भारत के साथ संबंधों को वे कितना महत्व देते हैं, इसका सशक्त प्रमाण है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि भारत और जर्मनी जैसी अर्थव्यवस्थाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बढ़ते व्यापार और निवेश संबंधों ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा प्रदान की है। प्रधानमंत्री ने बताया कि द्विपक्षीय व्यापार अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका है और 50 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दो हजार से अधिक जर्मन कंपनियां लंबे समय से भारत में सक्रिय हैं, जो भारत के प्रति उनके अटूट विश्वास और यहां मौजूद अपार संभावनाओं को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सुबह आयोजित भारत-जर्मनी सीईओ फोरम में इसकी जीवंत झलक देखने को मिली।

प्रधानमंत्री ने भारत और जर्मनी के बीच हुए समझौतों और आपसी सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग हर वर्ष और मजबूत हुआ है, जिसका प्रभाव आज धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और जर्मनी की प्राथमिकताएं समान हैं और इस सहयोग को और बढ़ाने के लिए इंडिया–जर्मनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि यह केंद्र ज्ञान, तकनीक और नवाचार के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश जलवायु, ऊर्जा, शहरी विकास और शहरी परिवहन जैसे क्षेत्रों में मिलकर नई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने उस मेगा प्रोजेक्ट का उल्लेख किया, जो दोनों देशों के लिए गेम चेंजर साबित होने वाला है। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारत और जर्मनी की कंपनियों के बीच शुरू किया गया नया मेगा प्रोजेक्ट भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और जर्मनी सुरक्षित, भरोसेमंद और लचीली सप्लाई चेन के निर्माण के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी विषयों पर आज किए गए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) से दोनों देशों के सहयोग को नई गति और मजबूती मिलेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा उद्योग से जुड़े रोडमैप का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और साझा दृष्टिकोण का प्रतीक है। उन्होंने रक्षा व्यापार से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए चांसलर मर्ज का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक रोडमैप पर भी काम किया जाएगा, जिससे सह-विकास (को-डेवलपमेंट) और सह-उत्पादन (को-प्रोडक्शन) के नए अवसर सृजित होंगे।

प्रधानमंत्री ने आम लोगों के बीच स्थापित संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत और जर्मनी के बीच ऐतिहासिक और गहरे पीपल-टू-पीपल (जनस्तर के) संबंध हैं। उन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर और मैडम कामा का उल्लेख करते हुए कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचनाओं ने जर्मनी के बौद्धिक जगत को नई दृष्टि दी, वहीं स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने जर्मनी सहित पूरे यूरोप को प्रेरित किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि मैडम कामा ने जर्मनी में पहली बार भारत का स्वतंत्रता ध्वज फहराकर हमारे स्वतंत्रता संघर्ष को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि आज हम इस ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक साझेदारी के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की स्किल को अहम बताते हुए कहा कि माइग्रेशन, मोबिलिटी और स्किल डेवलपमेंट पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिभाशाली युवाशक्ति जर्मनी की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। प्रधानमंत्री ने बताया कि आज ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप पर जारी संयुक्त घोषणापत्र (ज्वाइंट डेक्लेरेशन ऑफ इंटेंट) इसी भरोसे का प्रतीक है, जिससे विशेष रूप से हेल्थकेयर पेशेवरों की आवाजाही और अवसर आसान होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि खेलों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं, जो युवाओं को जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम साबित होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तैयार किया गया कॉम्प्रिहेंसिव रोडमैप हमारी साझेदारी को नई दिशा देगा। उन्होंने जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने का आमंत्रण दिया और भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-फ्री ट्रांजिट की घोषणा के लिए चांसलर मर्ज का आभार व्यक्त किया। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच और नजदीकियां बढ़ेंगी। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि गुजरात के लोथल में बनाए जा रहे नेशनल मेरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स से जर्मन मेरीटाइम म्यूजियम जुड़ रहा है, जो दोनों देशों के समुद्री इतिहास को जोड़ने वाला ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि ट्रेडिशनल मेडिसिन्स के क्षेत्र में गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी का जर्मनी के साथ करीबी सहयोग रहा है और इस महत्वपूर्ण विषय पर आज किए गए समझौतों (एमओयू) से हमारे सहयोग को और अधिक बल मिलेगा।