PM Modi Gana Visit: 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घाना दौरे पर भारत सरकार ने 4.69 करोड़ रुपये खर्च किए'- विदेश मंत्रालय

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पहले मंत्रालय ने खर्च की जानकारी देने से इनकार किया था।

The Indian government spent ₹4.69 crore on Prime Minister Narendra Modi's visit to Ghana.

PM Modi Gana Visit Expenditure: विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुलाई 2025 में हुई घाना यात्रा के दौरान हुए खर्च को लेकर अपना पहले दिया गया जवाब वापस ले लिया है। पहले मंत्रालय ने यह कहकर खर्च की जानकारी देने से इनकार किया था कि प्रधानमंत्री घाना सरकार के ‘स्टेट गेस्ट’ थे और इसलिए यात्रा से जुड़े खर्च भारत सरकार ने नहीं उठाए थे।

हालांकि, RTI एक्टिविस्ट अजय बसुदेव बोस की अपील के बाद मंत्रालय को अपना रुख बदलना पड़ा। अपील स्तर पर दिए गए जवाब में विदेश मंत्रालय ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री की घाना यात्रा पर भारत सरकार ने 4.69 करोड़ रुपये खर्च किए।

विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल डिवीज़न ने 26 नवंबर 2025 को दिए गए एक RTI जवाब में कहा था कि प्रधानमंत्री घाना सरकार के मेहमान के रूप में घाना गए थे और मेज़बान देश ने उनके ठहरने, स्थानीय परिवहन तथा आधिकारिक कार्यक्रमों से जुड़े खर्च वहन किए थे।

अजय बसुदेव बोस ने पहली अपील दायर की, जिसमें विदेश मंत्रालय से यह डॉक्यूमेंट्री सबूत मांगे गए कि क्या प्रधानमंत्री वास्तव में घाना सरकार के मेहमान थे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि घाना दौरे पर ‘ज़ीरो खर्च’ का दावा कैसे सही ठहराया जा सकता है, जबकि भारत सरकार ने जुलाई 2025 में BRICS समिट के लिए प्रधानमंत्री के ब्राज़ील दौरे पर करोड़ों रुपये खर्च किए थे। अपील में बोस ने विदेश मंत्रालय के पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर पर गुमराह करने वाली, अधूरी और गलत जानकारी देने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वे सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) जाएंगे।

28 जनवरी 2026 को विदेश मंत्रालय ने अपील पर नया जवाब देते हुए मामला निपटाया। मंत्रालय ने माना कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले आधिकारिक डेलीगेशन, उनके साथ आए अधिकारियों, सुरक्षा व्यवस्था और मीडिया पर कुल 4.69 करोड़ रुपये (469,940,976 रुपये) खर्च हुए। इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर हुए खर्च और सरकार द्वारा सार्वजनिक जानकारी देने की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अजय बसुदेव बोस का कहना है कि यह मामला केवल एक यात्रा के खर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि RTI के तहत मांगी गई जानकारी को अक्सर शुरू में टाल दिया जाता है या गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। इस मामले पर प्रधानमंत्री कार्यालय या विदेश मंत्रालय की तरफ़ से कोई सार्वजनिक सफ़ाई नहीं दी गई है।

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