'25 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले..', 42 देशों के संसदीय पदाधिकारियों के सम्मेलन में बोले PM, जानें बड़ी बाते

Rozanaspokesman

राष्ट्रीय, दिल्ली

पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।

'25 crore Indians lifted out of poverty,' PM Modi

PM Modi At 28th CSPOC: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) 2026 का उद्घाटन किया। उनका स्वागत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राज्यसभा के उपाध्यक्ष हरिवंश नारायण सिंह ने किया।

पीएम मोदी ने कहा कि यह चौथा मौका है जब कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स की कॉन्फ्रेंस भारत में आयोजित हो रही है। इस बार की कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय ‘इफेक्टिव डिलीवरी ऑफ पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी’ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने विविधता (डाइवर्सिटी) को डेमोक्रेसी की ताकत में बदल दिया है और साबित किया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएँ और प्रक्रियाएँ डेमोक्रेसी को स्थिरता (Stability), गति (Speed) और व्यापकता (Scale) तीनों प्रदान करती हैं।

'आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है'

संविधान सदन में CSPOC के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत आज कई क्षेत्रों में वैश्विक अग्रणी बन चुका है। भारत में यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता है और नंबर-2 स्टील उत्पादक है। देश में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम और तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है। इसके अलावा, भारत का रेल नेटवर्क दुनिया में चौथा और मेट्रो रेल नेटवर्क तीसरे स्थान पर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिस स्थान पर आप सभी बैठे हैं, वह भारत के लोकतांत्रिक सफर का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुलामी के अंतिम वर्षों में, जब भारत की स्वतंत्रता तय हो चुकी थी, इसी सेंट्रल हॉल में संविधान सभा की बैठकें आयोजित हुई थीं, जहां भारत के संविधान की रचना हुई। स्वतंत्रता के बाद 75 वर्षों तक यह इमारत भारत की संसद रही। इसी हॉल में देश के भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय और चर्चाएं हुईं। लोकतंत्र को समर्पित इस स्थल को भारत ने ‘संविधान सदन’ का नाम दिया है।

'विविधता हमारे लोकतंत्र की ताकत': PM

28वें CSPOC को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह चौथी बार है जब कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस भारत में आयोजित हो रही है। इस साल का मुख्य विषय ‘संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी डिलीवरी’ है, जो आज के वैश्विक संदर्भ में बेहद प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत की स्वतंत्रता के समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बात पर गंभीर संदेह था कि इतनी अधिक विविधता वाला देश लोकतंत्र को कायम रख पाएगा या नहीं। भारत ने इन आशंकाओं को गलत साबित किया और अपनी विविधता को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि एक और चिंता यह थी कि अगर लोकतंत्र किसी तरह बच भी गया, तो भारत विकास के मामले में पीछे रह जाएगा। भारत में लोकतंत्र का मतलब ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ है। हमने लोक कल्याण की भावना के साथ हर व्यक्ति के लिए बिना किसी भेदभाव के काम किया है। इसी लोक कल्याण की नीति के कारण बीते कुछ वर्षों में भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल पाए हैं। भारत हर वैश्विक मंच पर ग्लोबल साउथ के हितों को मजबूती से उठाता रहा है और अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान भी ग्लोबल साउथ की चिंताओं को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक और एक महिला हैं, वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। आज भारतीय महिलाएं न केवल लोकतंत्र में भाग ले रही हैं, बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं। आप में से कई लोग भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र मानते हैं। वास्तव में, हमारे लोकतंत्र का पैमाना असाधारण है। उदाहरण के तौर पर, 2024 में हुए आम चुनाव मानव इतिहास के सबसे बड़े लोकतांत्रिक अभ्यास थे। लगभग 98 करोड़ नागरिकों ने वोट के लिए पंजीकरण कराया, जो कुछ महाद्वीपों की जनसंख्या से भी अधिक है। इन चुनावों में 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से अधिक राजनीतिक पार्टियों ने भाग लिया, और महिलाओं के मतदान में भी रिकॉर्ड भागीदारी दर्ज की गई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र अपनी विविधता में अविश्वसनीय रूप से समृद्ध है। पूरे देश में सैकड़ों भाषाएँ बोली जाती हैं। 900 से अधिक टेलीविजन चैनल विभिन्न भाषाओं में प्रसारण करते हैं, और हजारों अखबार और पत्रिकाएँ प्रतिदिन प्रकाशित होती हैं। यही जीवंतता, समावेशिता और व्यापकता भारतीय लोकतंत्र की असली ताकत है। 

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में इस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें 42 कॉमनवेल्थ देशों के 61 स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स के साथ-साथ चार अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। यह कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर अपनी महत्ता को दर्शाता है। इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, मलेशिया, नामीबिया, ट्रिनिडाड और टोबैगो, टोंगा, कैमरून जैसे देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियाई हाई कमीशन के प्रमुख फिलिप ग्रीन भी कार्यक्रम में उपस्थित हैं।

(For more news apart from '25 crore Indians lifted out of poverty,' PM Modi news in hindi, stay tuned to Rozanaspokesman Hindi)