Punjab News: 'पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति खोखली, बोर्ड एग्जाम में पंजाबी भाषा से खिलवाड़': परगट सिंह
शिक्षा बोर्ड की बहुत गंभीर प्रशासनिकऔर टेक्निकल नाकामी के लिए पंजाब सरकार ज़िम्मेदार है
Punjab News: पूर्व शिक्षा मंत्री और MLA परगट सिंह ने पंजाब सरकार के शिक्षा क्रांति के दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने खुद माना है कि मॉडर्न होने का दावा करने वाले सरकारी स्कूलों के टीचरों को पढ़ाना भी नहीं आता। यह सरकार की नाकामी है। इसी बीच, अब पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को गंभीर प्रशासनिक और टेक्निकल नाकामी का सामना करना पड़ रहा है। बोर्ड एग्जाम में पंजाबी भाषा में लापरवाही दिखाई गई। उन्होंने मांग की कि ज़िम्मेदारी तय की जाए और पंजाबी भाषा के प्रति इस लापरवाही को तुरंत रोका जाए।
परगट सिंह ने कहा कि आठवीं क्लास के साइंस के सवाल-जवाब के पंजाबी (गुरुमुखी) वर्जन से 15 नंबर के तीन सवाल गायब थे, जबकि हिंदी और इंग्लिश वर्जन में पूरे 30 सवाल छपे थे। यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और रीजनल भाषाओं के साथ भेदभाव का साफ मामला है।
इस गलती की वजह से पंजाबी मीडियम के तीन लाख से ज़्यादा स्टूडेंट्स के करीब 19% नंबर खराब हो गए हैं। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी गलतियां बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं।
परगट सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में एजुकेशन रेवोल्यूशन का हवाला देकर लोगों को बेवकूफ बनाया और पंजाब में सरकार बना ली। पिछले चार साल से पंजाब में एजुकेशन रेवोल्यूशन लाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सच तो यह है कि ये दावे सिर्फ कागजों पर हैं। इनमें कोई सच्चाई नहीं है। जब एजुकेशन मिनिस्टर हरजोत बैंस ने स्कूलों का इंस्पेक्शन किया तो उन्हें पता चला कि टीचरों को पढ़ाना नहीं आता। जब इन टीचरों को पढ़ाना नहीं आता तो आप चार साल से किस एजुकेशन रेवोल्यूशन की बात कर रहे हैं? शिक्षा मंत्री, शिक्षा की खराब हालत के लिए टीचरों को दोषी ठहराकर अपनी और पंजाब सरकार की नाकाबिलियत नहीं छिपा सकते।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों को अपनी पार्टी के झंडे के रंग में रंग दिया है। स्कूलों का राजनीतिकरण किया जा रहा है। इन तरीकों से शिक्षा में सुधार नहीं हो सकता। वह पहले ही कह चुके हैं कि पंजाब भर के हजारों सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल, हेडमास्टर और दूसरे टीचरों की खाली पोस्ट भरी जानी चाहिए। स्कूल का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जाना चाहिए। सरकारी स्कूलों की टूटी-फूटी बिल्डिंगों की मरम्मत की जानी चाहिए। सच तो यह है कि अभी भी कई स्कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग टॉयलेट नहीं हैं।
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