आम आदमी पार्टी का सरकारी स्कूलों को पार्टी के रंग में रंगने का फैसला शर्मनाक : परगट सिंह

Rozanaspokesman

राष्ट्रीय, पंजाब

भारतीय जनता पार्टी के नक्शे कदम पर चली आम आदमी पार्टी, दोनों एक सिक्के के पहलू

Pargat Singh

चंडीगढ़ : पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने आम आदमी पार्टी पर बेशर्मी की सभी हदें पार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आरएसएस-भाजपा लंबे समय से युवा दिमागों पर अपनी विचारधारा थोपने के लिए शिक्षण संस्थानों का भगवाकरण कर रहे हैं। अब उसी रास्ते पर चलते हुए आम आदमी पार्टी ने पंजाब के सरकारी स्कूलों को अपनी पार्टी के झंडे के रंगों में रंगने का आदेश दिया है। जोकि बेहद शर्मनाक फैसला है। यह शिक्षा के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपना तानाशाही फरमान वापिस लेना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और अच्छे माहौल व अध्यापक उपलब्ध करवाने की बजाए स्कूलों को पार्टी के रंग में रंगने का काम करना शिक्षा और बच्चों की आजादी पर हमला है। कांग्रेस पार्टी इसे होने नहीं देगी और पंजाब के लोग इस फैसले को बर्दाश्त नहीं करेंगे। शिक्षा को राजनीति से दूर रखना सरकारों की जिम्मेदारी होती है। 

पंजाब सरकार ने 852 सरकारी मिडल, हाई और सीनियर सैकेंडरी स्कूलों को रंग-रोगन के नाम पर अपनी पार्टी के रंग में रंगने का आदेश जारी कर दिया है। सरकार ने जारी आदेश में साफ तौर पर पार्टी के दो प्रमुख रंगों का कलर कोड तक स्पष्ट रूप से बताया है। ताकि पार्टी के झंडे का रंग सभी स्कूलों पर एक जैसे दिखे। रंग रोगन के लिए इन सभी स्कूलों पर 17.44 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान रखा गया है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के जिला संगरूर में सबसे ज्यादा 102 स्कूलों को चुना गया है, जबकि इनके अलावा लुधियाना से 70, अमृतसर के 84, पटियाला व फाजिल्का के 63-63 स्कूल शामिल हैं। वहीं जालंधर से सिर्फ 40 स्कूल शामिल किए गए हैं। बहुत सारे जिलों में कुछ ही स्कूलों को शामिल किया गया है।

परगट सिंह ने चेताया कि सरकारी स्कूल किसी पार्टी की नहीं बल्कि राज्य की संपत्ति है। स्कूल और स्टूडेंट्स को आम आदमी पार्टी अपने राजनीतिक प्रोपेगेंडे का हथियार बना रही है। बच्चों और शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक प्रभाव में लाकर किसी पार्टी की पहचान थोपने की कोशिश करना सीधे तौर पर शिक्षा पर हमला है। राजनीतिक रंगों में रंगना बच्चों की आजाद सोच और शिक्षा की आजादी पर गंभीर खतरा है। 

उन्होंने कहा कि एक समय पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान तंज कसा करते थे कि कूची फेरने से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता है। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए, अच्छे स्कूल टीचर और माहौल होना अनिवार्य है। लेकिन अब खुद ही रंग-रोगन के जरिए स्कूलों पर राजनीतिक प्रोपेगंडा किया जा रहा है।