Who is V Ramanathan? भारतीय मूल के वैज्ञानिक को मिला ‘जियो साइंस का नोबेल’,50 साल पहले किया था ग्लोबल वार्मिंग पर शोध

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यह पुरस्कार मई 2026 में स्टॉकहोम में आयोजित ‘क्रैफोर्ड डेज’ के दौरान प्रदान किया जाएगा।

Who is 81-year-old Veerabhadran Ramanathan? The Indian scientist who's won the ‘Nobel of Geosciences

2026 Crafoord Prize in Geosciences: भारतीय मूल के जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को ‘रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज’ द्वारा 2026 में भू-विज्ञान के क्षेत्र का क्रैफोर्ड पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की गई है। इसे अक्सर ‘भू-विज्ञान का नोबेल’ कहा जाता है। रामनाथन को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से उनके दशकों लंबे शोध के लिए सम्मानित किया गया है, जिसमें उन्होंने ‘सुपर-प्रदूषकों’ और वायुमंडलीय ‘ब्राउन क्लाउड्स’ का अध्ययन किया, जिसने वैश्विक ताप वृद्धि (ग्लोबल वॉर्मिंग) की समझ को नई दिशा दी।

82 वर्षीय रामनाथन ने 1975 में NASA में काम करते हुए एक ऐतिहासिक खोज की थी। उन्होंने यह पता लगाया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC), जो एरोसोल और रेफ्रिजरेटर में व्यापक रूप से इस्तेमाल होते थे, वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 10,000 गुना अधिक प्रभावी तरीके से गर्मी रोकते हैं।

कौन हैं वीरभद्रन रामनाथन ? (Who is Veerabhadran Ramanathan) 

वीरभद्रन रामनाथन भारतीय मूल के एक प्रसिद्ध जलवायु वैज्ञानिक हैं, जिन्हें आधुनिक क्लाइमेट साइंस में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए विश्वभर में सम्मानित किया जाता है। 1975 में NASA में अपने शोध के दौरान, उन्होंने यह ऐतिहासिक खोज की कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC), जो एरोसोल और रेफ्रिजरेटर में व्यापक रूप से इस्तेमाल होती हैं, वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 10,000 गुना अधिक प्रभावी तरीके से गर्मी खींचती हैं। उनके इस शोध ने ग्लोबल वॉर्मिंग और वायुमंडलीय बदलाव को समझने में नई दिशा दी।

दशकों तक उन्होंने “सुपर-प्रदूषकों” और वायुमंडलीय “ब्राउन क्लाउड्स” पर काम किया, जिससे वैश्विक ताप वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान मिला। उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें 2026 में भू-विज्ञान के क्षेत्र का क्रैफोर्ड पुरस्कार प्रदान किया गया, जिसे अक्सर “भू-विज्ञान का नोबेल” कहा जाता है।

क्रैफोर्ड पुरस्कार के तहत उन्हें लगभग 9 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि और एक स्वर्ण पदक दिया जाएगा. यह पुरस्कार मई 2026 में स्टॉकहोम में आयोजित ‘क्रैफोर्ड डेज' के दौरान प्रदान किया जाएगा. रामनाथन का शोध मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों की बुनियाद बना, जिसने वातावरण में लाखों टन हानिकारक उत्सर्जन को जाने से रोका है.

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