कहा- शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस और भाजपा का कब्जा है
नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन के सिलसिले में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करें और उनके मुद्दे के समाधान के लिए उचित कदम उठाएं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि झारखंड में छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और उनकी मांगें जायज हैं। उन्होंने यह पत्र 14 अगस्त को लिखा था, जिसे कांग्रेस ने सोमवार को जारी किया। कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल है।
सोरेन को लिखे पत्र में गांधी ने कहा कि देश के युवा उसका भविष्य हैं और संकट की इस घड़ी में हमें उनके साथ एकजुटता और समर्थन जताना चाहिए। उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी का मानना है कि संविधान में निहित शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार हमारे लोकतंत्र के केंद्रीय स्तंभों में से एक है। इसलिए, हमने पिछले कुछ महीनों में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को अपना पूरा समर्थन दिया है।
गांधी ने कहा कि कांग्रेस का यह भी मानना है कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस और भाजपा का कब्जा हो गया है तथा इसे छात्रों के शोषण और दमन के औजार में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह अब वैसी मजबूत शिक्षा प्रणाली नहीं रह गई है, जैसी एक दशक पहले थी।
छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण है
सोरेन को लिखे पत्र में गांधी ने कहा, जैसा कि आप जानते हैं, झारखंड में छात्र राज्य की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ भी प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और उनकी मांगें जायज हैं। गांधी ने कहा, मैं इस बात की सराहना करता हूं कि झारखंड सरकार ने आपके द्वारा गठित समिति के माध्यम से उनके साथ संवाद शुरू किया है। मेरा मानना है कि छात्रों की कई मांगों पर सहमति भी बनी है। हालांकि, प्रदर्शन जारी है और कुछ छात्र अब भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
प्रदर्शनकारियों से करें मुलाकात
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, मैं यह सुझाव देने के लिए पत्र लिख रहा हूं कि आप व्यक्तिगत रूप से प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करें। इससे उनकी शेष चिंताओं के समाधान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी। भारत के युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए गांधी ने कहा कि संकट की इस घड़ी में छात्रों को हरसंभव एकजुटता और समर्थन दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, कृपया उनकी बात सुनने और इस मुद्दे के समाधान के लिए उचित कदम उठाने की पूरी कोशिश करें।