कहा, 'OTT पर रिलीज हो रहे इस फिल्म का वर्जन हमें मंजूरी है'
पंजाबी एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'पंजाब 95', जो काफी समय से विवादों में थी, अब OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर 'सतलुज' टाइटल से रिलीज हो गई है। यह फिल्म ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है। इसे हनी त्रेहान ने डायरेक्ट किया है और RSVP और मैकगफिन पिक्चर्स ने इसे प्रोड्यूस किया है।
जब फिल्म को 2023 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था, तो बोर्ड ने टाइटल पर आपत्ति जताई और कई बदलाव और कट्स का सुझाव दिया। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर 'पंजाब 95' कर दिया गया। फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर 2023 टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जहां इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ की परफॉर्मेंस को इंटरनेशनल लेवल पर तारीफ मिली थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CBFC ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलाव सुझाए थे। इनमें कुछ ऐतिहासिक रेफरेंस, जगहों और कैरेक्टर के नामों में बदलाव शामिल थे। हालांकि, CBFC ने इन सभी सुझाए गए बदलावों की डिटेल्ड ऑफिशियल जानकारी पब्लिक में जारी नहीं की। देश में सैंसर क्लियरेंस न मिलने की वजह से फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी।
इसके बाद, इसे 7 फरवरी, 2025 को कुछ चुनिंदा देशों में रिलीज किया गया। फिल्म 'सतलुज' की रिलीज पर खालरा परिवार ने खुशी जताई। फिल्म 'सतलुज' की रिलीज पर खुशी जाहिर करते हुए शहीद जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी बीबी परमजीत कौर खालड़ा ने कहा कि मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि मेरे पति शहीद जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी, संघर्ष और कानूनी लड़ाई पर आधारित यह फिल्म, सालों तक राजनीतिक साज़िशों और कई चुनौतियों का सामना करने के बाद, आखिरकार OTT मीडियम के जरिए दर्शकों तक पहुंच रही है।
हम, खालड़ा परिवार के तौर पर, यह साफ करना चाहते हैं कि OTT पर रिलीज हो रही फिल्म के इस वर्जन को हमारी मंजूरी है। यह ओरिजिनल वर्जन है जो सबसे पहले हमारे परिवार को दिखाया गया था। हमें खुशी है कि बहुत ज्यादा दबाव और बदलाव की कोशिशों के बावजूद, इसकी ओरिजिनल भावना और सच्चाई को बनाए रखा गया है।
जसवंत सिंह खालड़ा की पूरी जिंदगी सच्चाई, न्याय और मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए बिना डरे संघर्ष की निशानी थी। इसलिए, हमारे लिए यह बहुत जरूरी था कि उनकी कहानी और सिख नरसंहार की घटना को बिना किसी समझौते, बिना किसी तोड़-मरोड़ के और पूरी ईमानदारी के साथ पेश किया जाए। बीबी परमजीत कौर खालड़ा ने कहा कि हम डायरेक्टर हनी त्रेहान का दिल से शुक्रिया अदा करते हैं, जिन्होंने अपने उसूलों पर अडिग रहते हुए, न सिर्फ इस फिल्म की आर्टिस्टिक और ऐतिहासिक सच्चाई से कोई समझौता नहीं किया, बल्कि 25,000 से ज्यादा लावारिस लाशों की दर्दनाक सच्चाई और जसवंत सिंह खालड़ा द्वारा सिख संघर्ष की सच्चाई को दुनिया के सामने लाने के लिए लड़ी गई कानूनी लड़ाई को भी पूरी सच्चाई के साथ पेश किया।
इतिहास के इस अहम हिस्से की सच्ची भावना को बचाए रखने के लिए उनका समर्पण हमारे सम्मान का हकदार है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि यह फिल्म शहीद जसवंत सिंह खालड़ा की विरासत को श्रद्धांजलि साबित होगी और दुनिया भर के दर्शकों को सच्चाई, न्याय, जवाबदेही और इंसानी गरिमा के हमेशा रहने वाले मूल्यों बारे सोचने और उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।
जसवंत सिंह खालड़ा एक हिम्मत वाले और समर्पित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट थे, जिन्होंने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में सिखों पर हो रहे अत्याचारों और ह्यूमन राइट्स के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाई थी। उस दौरान हजारों सिख युवाओं को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया और फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया, जिसके बाद उनके शवों का चुपके से अंतिम संस्कार कर दिया गया था।