पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाने की बात गलत, इंजन खराब की कोई रिपोर्ट नहीं
नई दिल्लीः बीते दिन से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही थी, जिसमें एथेनॉल की वजह से फ्यूल टैंक के पास चींटियां लगने का दावा किया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एथेनॉल फ्यूल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने मंगलवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना पूरी तरह से साइंटिफिक है और इसकी लगातार निगरानी की जा रही है।
हाल में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वाहन के फ्यूल टैंक के पास चींटियां दिखाई गई थीं। इस पर भारत पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईंधन ग्रेड एथेनॉल में कोई शर्करा (चीनी) नहीं होती। मंत्रालय के अनुसार, कुछ लोग पुराने वीडियो और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर दोबारा शेयर कर जनता में भ्रम फैला रहे हैं। सरकार ने कहा कि E-20 पेट्रोल डालने के बाद इंजन खराब होने की कोई रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है।
केंद्र सरकार ने कहा कि E-20 पेट्रोल (20% एथेनॉल फ्लेक्स ईंधन) के इस्तेमाल से वाहन बीमा (इंश्योरेंस) की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। इस तरह की आशंकाएं गलत हैं और संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद इन्हें खारिज कर दिया गया है। सरकार के अनुसार, अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग हो रहा है। ब्राजील में तो E-27 लंबे समय से ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
एथेनॉल के इस्तेमाल से सरकार ने गिनाए 3 फायदे
- 1.4 लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बची: सरकार ने बताया कि एथेनॉल प्रोग्राम की वजह से कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। इससे देश को अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली।
- किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा: सरकार ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली कृषि उपज की मांग बढ़ने से किसानों की आय को समर्थन मिला है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।
- ऊर्जा सुरक्षा और पॉल्यूशन कंट्रोल में मदद: बयान के मुताबिक, एथेनॉल फ्यूल देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर रहा है और कार्बन उत्सर्जन कम कर रहा है।