माइनिंग विभाग के क्लर्क चंद्रशेखर को किया गिरफ्तार, 15 की हो चुकी है गिरफ्तारी
हरियाणा के नारनौल में अवैध खनन से जुड़े घोटाले में विजिलेंस की टीम ने कार्रवाई करते हुए माइनिंग विभाग के क्लर्क चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया है। इसी मामले में करीब 10 दिन पूर्व सहायक खनन अधिकारी को पंचकूला से गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच के बाद की गई है, जिसमें सरकारी राजस्व को लाखों रुपये की हानि पहुंचाने के आरोप सामने आए थे।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) रेवाड़ी व नारनौल की संयुक्त टीम इस मामले की जांच कर रही थी। जांच में सामने आया कि खनन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने वाहन मालिकों के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए और राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के आदेशों की अनदेखी करते हुए कम जुर्माना वसूल कर वाहनों को छोड़ दिया।
जांच में खुलासा हुआ कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों पर तय पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि के बजाय कम जुर्माना लिया गया। इसके लिए वाहन मालिकों द्वारा फर्जी शपथ पत्र और गलत कीमत के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिन्हें विभागीय अधिकारियों ने सत्यापन किए बिना स्वीकार कर लिया। इस प्रक्रिया में कई मामलों में 4 लाख रुपये तक के जुर्माने को घटाकर 2 लाख रुपये या उससे भी कम कर दिया गया, जिससे सरकार को करीब 21 लाख रुपये की वित्तीय हानि पहुंची।
इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन खनन अधिकारी, सहायक खनन अभियंता, लिपिक व अन्य कुल 17 कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जांच एजेंसी ने संबंधित धाराओं धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी।
विजिलेंस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार क्लर्क से पूछताछ जारी है और इस मामले में बचे एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी भी जल्द हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ए.सी.बी. के इंस्पेक्टर अशोक कुमार ने बताया कि इस मामले में 17 में से 15 को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, अब 16वें क्लर्क चंद्रशेखर को भी गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आरोपी एम.ओ. राजेंद्र की गिरफ्तारी बाकी है, जिनको जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।