Ajj da Hukamnama Sri Darbar Sahib: आज का हुक्मनामा (3 जुलाई 2026)
Published : Jul 3, 2026, 7:23 am IST
Updated : Jul 3, 2026, 7:23 am IST
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Hukamnama of the Day from Sri Darbar Sahib: Today's Hukamnama (3 July 2026)
Hukamnama of the Day from Sri Darbar Sahib: Today's Hukamnama (3 July 2026)

हरि जीउ तुधु नो सदा सालाही पिआरे जिचरु घट अंतरि है सासा ॥

हुकमनामा साहिब

सोरठि महला ३ ॥
हरि जीउ तुधु नो सदा सालाही पिआरे जिचरु घट अंतरि है सासा ॥ इकु पलु खिनु विसरहि तू सुआमी जाणउ बरस पचासा ॥ हम मूड़ मुगध सदा से भाई गुर कै सबदि प्रगासा ॥१॥
हरि जीउ तुम आपे देहु बुझाई ॥ हरि जीउ तुधु विटहु वारिआ सद ही तेरे नाम विटहु बलि जाई ॥ रहाउ ॥
हम सबदि मुए सबदि मारि जीवाले भाई सबदे ही मुकति पाई ॥ सबदे मनु तनु निरमलु होआ हरि वसिआ मनि आई ॥ सबदु गुर दाता जितु मनु राता हरि सिउ रहिआ समाई ॥२॥
सबदु न जाणहि से अंने बोले से कितु आए संसारा ॥ हरि रसु न पाइआ बिरथा जनमु गवाइआ जमहि वारो वारा ॥ बिसटा के कीड़े बिसटा माहि समाणे मनमुख मुगध गुबारा ॥३॥
आपे करि वेखै मारगि लाए भाई तिसु बिनु अवरु न कोई ॥ जो धुरि लिखिआ सु कोइ न मेटै भाई करता करे सु होई ॥ नानक नामु वसिआ मन अंतरि भाई अवरु न दूजा कोई ॥४॥४॥

हुकमनामा साहिब - हिंदी अर्थ

सोरठि महला ३ ॥ हे हरि ! जब तक मेरे शरीर में जीवन सांसें हैं, तब तक मैं सर्वदा तेरी ही महिमा-स्तुति करता रहूँ। हे मेरे स्वामी ! यदि मैं तुझे एक पल एवं क्षण भर के लिए विस्मृत कर दूँ तो मैं इसे पचास वर्ष के बराबर समझता हूँ। हे भाई ! हम तो हमेशा से ही विमूढ एवं बुद्धिहीन थे लेकिन गुरु के शब्द से हमें ज्ञान का प्रकाश मिल गया है॥ १॥
हे हरि ! तुम स्वयं ही हम जीवों को सुबुद्धि प्रदान करते हो। इसलिए मैं तुझ पर हमेशा ही कुर्बान जाता हूँ और तेरे नाम पर न्यौछावर होता हूँ॥ रहाउ॥
हे भाई ! हम गुरु-शब्द द्वारा ही मोह-माया के प्रति मरे हैं और शब्द द्वारा ही मरकर पुन:जीवित हुए हैं और शब्द के द्वारा ही मुक्ति प्राप्त हुई है। शब्द से ही मन एवं तन निर्मल हुआ और हरि आकर मन में निवास कर गया है। शब्द रूपी गुरु ही दाता है, जिससे मेरा मन लीन हो गया है और मैं प्रभु में समाया रहता हूँ॥ २॥
जो शब्द के रहस्य को नहीं जानते, वे अन्धे एवं बहरे हैं, फिर वे दुनिया में किसलिए आए हैं ? उन्होंने हरि रस को प्राप्त नहीं किया एवं यूं ही अपना जीवन व्यर्थ ही गंवा दिया है और फिर बार-बार जन्मते रहते हैं। ऐसे मूर्ख एवं अज्ञानी मनमुख व्यक्ति विष्टा के ही कीड़े हैं और विष्टा में ही गल-सड़ जाते हैं।॥ ३॥
हे भाई ! ईश्वर स्वयं ही जीवों को पैदा करके उनका पालन-पोषण करता है और सन्मार्ग लगाता है।उसके अलावा दूसरा कोई रचयिता नहीं। हे भाई ! जो जीवों की किस्मत में आरंभ से ही लिखा हुआ है, उसे कोई भी मिटा नहीं सकता, जो सृजनहार करता है, वही होता है। नानक का कथन है कि हे भाई ! मन के भीतर प्रभु का नाम निवास कर गया है और उसके सिवाय कोई दूसरा है ही नहीं ॥ ४॥ ४॥

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