हरि बिसरत सदा खुआरी ॥
हुकमनामा साहिब
टोडी महला ५ ॥
हरि बिसरत सदा खुआरी ॥ ता कउ धोखा कहा बिआपै जा कउ ओट तुहारी ॥ रहाउ ॥
बिनु सिमरन जो जीवनु बलना सरप जैसे अरजारी ॥ नव खंडन को राजु कमावै अंति चलैगो हारी ॥१॥
गुण निधान गुण तिन ही गाए जा कउ किरपा धारी ॥ सो सुखीआ धंनु उसु जनमा नानक तिसु बलिहारी ॥२॥२॥
हुकमनामा साहिब - हिंदी अर्थ
टोडी महला ५ ॥ भगवान को विस्मृत करने से मनुष्य सदैव ही ख्वार होता रहता है। हे परमेश्वर ! जिसे तुम्हारी शरण मिली हुई है, फिर वह कैसे धोखे का शिकार हो सकता है ॥ रहाउ ॥
भगवान के सिमरन के बिना जीना वासनाओं की अग्नि में जलने की भांति है, जिस तरह एक सॉप अपने आंतरिक जहर को पालता हुआ लम्बी उम्र तक जहर की जलन में जलता रहता है। चाहे मनुष्य समूचे विश्व को जीतकर शासन कर ले परन्तु सिमरन के बिना अंत में वह जीवन की बाजी हारकर चला जाएगा ॥ १॥
हे नानक ! जिस पर उसने अपनी कृपा-दृष्टि की है, उसने ही गुणों के भण्डार परमात्मा का गुणगान किया है। वास्तव में वही सुखी है और उसका ही जीवन धन्य है तथा मैं उस पर ही न्योछावर होता हूँ॥ २॥ २॥