हिरासत में लिए दोनों सिख युवकों को किया जाए रिहा, मामले की हो निष्पक्ष जांच
चंडीगढ़ः अंबाला में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सिख प्रदर्शनकारियों के साथ हरियाणा पुलिस की तरफ से किए कथित दुर्व्यवहार और बल प्रयोग की पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाने वाले नागरिकों को पीटना लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रदर्शनकारी 2 सिख युवकों की रिहाई तथा उस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे, जिसने कथित तौर पर अपनी कार से लोगों को टक्कर मारी थी।
परगट सिंह ने कहा कि हरियाणा सरकार को स्पष्ट करना होगा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ पुलिस ने किसके आदेश पर और क्यों ऐसा व्यवहार किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस पूरे मामले पर चुप नहीं रह सकते। उन्हें पंजाबियों और सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में भाजपा की सरकार पंजाबियों पर लाठियां बरसा रही है और इधर, पंजाब में भाजपा की बी-टीम आम आदमी पार्टी की सरकार युवाओं, नौकरी मांग रहे बेरोजगारों और महिलाओं तक को लाठियों से पीट रहे हैं। पहली बार है जब पंजाब में लाठियां चलाने की इतनी सारी घटनाएं हुई हैं। उन्होंने नायब सैनी पर भी तंज कसा। कहा कि पंजाब आकर पंजाबियों से वोट मांगते हैं और फिर हरियाणा में उन्हें पंजाबियों पर आंसू गैस के गोले छोड़ते हैं और लाठियों से पिटवाते हैं।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले में कथित तौर पर विवाद को भड़काने वाले व्यक्ति की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को विवादित या भड़काऊ बयानों के माध्यम से सामाजिक माहौल खराब करने की छूट नहीं दी जा सकती। सरकार का दायित्व है कि वह कानून का शासन कायम करे, न कि किसी विवाद को राजनीतिक या सामाजिक तनाव का कारण बनने दे।
परगट सिंह ने चेतावनी दी कि सिख और पंजाबी समाज के सम्मान तथा लोकतांत्रिक अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। हरियाणा सरकार से मांग की है कि हिरासत में लिए दोनों सिख युवकों को तत्काल रिहा किया जाए, उनके खिलाफ दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस ज्यादती की स्वतंत्र जांच करवाई जाए।