जालंधर और जीरा में 48 घंटे में 3 युवकों की ओवरडोज से हुई मौत
सेवामुक्त आईएएस अधिकारी व फगवाड़ा से विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल ने पंजाब में लगातार बढ़ रही नशे की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़े और ओवरडोज से हो रही मौतों के मामले पंजाब सरकार के उन दावों की सच्चाई सामने ला रहे हैं, जिनमें राज्य से नशा खत्म करने की बात कही जाती है। जालंधर और जीरा में पिछले 48 घंटे में 3 युवकों की नशे की ओवरडोज से मौत हो गई है। ये तीनों मौतें सरकार के युद्ध नशे के विरुध के दावों की हवा निकाल रही हैं।
धालीवाल ने कहा कि मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान नशे की ओवरडोज से 139 लोगों की मौत हुई है, जबकि इससे पहले वर्ष में यह संख्या 106 थी। रिपोर्ट में सामने आया है कि वर्ष 2025 के पहले 4 महीनों में ही 34 लोगों की मौत ओवरडोज के कारण हो चुकी है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है। धालीवाल ने पंजाब सरकार से मांग की है कि नशा तस्करी के नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई की जाए, युवाओं के पुनर्वास के लिए प्रभावी कार्यक्रम लागू किए जाएं तथा नशे से होने वाली मौतों की जवाबदेही तय की जाए। पंजाब के लोग सरकार से जानना चाहते हैं कि जिम्मेदारी तय होने से पहले कितनी और जानें जाएंगी?
उन्होंने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में वर्ष 2024 के दौरान एनडीपीएस एक्ट के तहत 12,113 मामले दर्ज किए गए, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 11,026 थी। यह बढ़ोतरी साबित करती है कि राज्य में नशे का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है और सरकार की रणनीति अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही है। धालीवाल ने कहा कि नशे की ओवरडोज से हुई हर मौत के पीछे एक बिखरा हुआ परिवार, दुखी माता-पिता और अधूरे सपनों की दर्दनाक कहानी होती है। किसी भी मां-बाप को अपने जवान बेटे या बेटी को खोने का दुख नहीं झेलना चाहिए लेकिन पंजाब में आए दिन सामने आ रही ऐसी घटनाएं पूरे समाज को झकझोर रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार विज्ञापनों, प्रचार और बड़े-बड़े दावों में व्यस्त दिखाई देती है, जबकि पंजाब का युवा वर्ग इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहा है। लोगों को अब भाषणों और घोषणाओं की नहीं, बल्कि जवाबदेही, ठोस कार्रवाई और जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों की आवश्यकता है।