कटारूचक ने बताया कि चिड़ियाघर अप्रैल माह में अपनी स्वर्ण जयंती पूरी करेगा और विभाग इस अवसर को भव्य रूप से मनाने पर विचार कर रहा है।
Punjab News: छतबीड़ चिड़ियाघर में वीरवार को आयोजित समारोह के दौरान तीन मादा शावकों का नामकरण किया गया। तीनों शावक मादा होने के कारण उनके नाम मां गौरी के पहले अक्षर ‘ग’ से रखे गए। एक का नाम गरिमा (शान, गंभीरता और महानता), दूसरी का गुंजन (मधुर और संगीतपूर्ण ध्वनि) और तीसरी का गजल (सुरमयी काव्य शैली) रखा गया।
इन शावकों का जन्म सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व के दिन हुआ था, जिसे एक शुभ संयोग और आशीर्वाद के रूप में देखा जा रहा है। वर्ष 2024 में दीपावली के दिन भी इसी बाघ जोड़ी ने दो नर शावकों को जन्म दिया था।
शावकों का नामकरण भगवंत सिंह मान ने किया था। चिड़ियाघर के स्टडबुक नियमों के अनुसार वैज्ञानिक रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए शावकों के नाम निर्धारित किए जाते हैं। इसके तहत नर शावक का नाम पिता के नाम के पहले अक्षर से और मादा शावक का नाम मां के नाम के पहले अक्षर से रखा जाता है।
नामकरण समारोह में पंजाब के वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारूचक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन पंजाब के मुख्य वन्यजीव वार्डन बसंत राज कुमार की अगुवाई में किया गया।
चिड़ियाघर की सफेद मादा बाघ ‘गौरी’ ने 5 नवंबर 2025 को तीन शावकों को जन्म दिया था। गौरी को वर्ष 2019 में राजकोट चिड़ियाघर से छतबीड़ लाया गया था। इन शावकों के पिता बंगाल टाइगर ‘अर्जुन’ हैं, जिनका जन्म 2019 में छतबीड़ चिड़ियाघर में ही हुआ था।
13 अप्रैल 2026 को बैसाखी के दिन छतबीर चिड़ियाघर अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे करेगा। इस अवसर पर बाघ शावकों को दर्शकों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा और विभिन्न विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
चिड़ियाघर की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए Instagram और Facebook पर आधिकारिक पेज बनाए गए हैं। बैसाखी समारोह के दौरान सोशल मीडिया प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इसमें #Chhatbir हैशटैग के साथ फोटो और रील अपलोड करने वाले प्रतिभागियों में से सर्वश्रेष्ठ को सम्मानित किया जाएगा।
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