बच्चों में देरी से चलना-बैठना हो सकता है SMA का संकेत, खतरनाक साबित हो सकती है ये बीमारी
Published : Mar 30, 2026, 10:45 am IST
Updated : Mar 30, 2026, 10:45 am IST
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Delayed walking and sitting in children may be a sign of SMA; this disease can prove dangerous
Delayed walking and sitting in children may be a sign of SMA; this disease can prove dangerous

डॉ बोले, माता-पिता को इसका अंदाजा तब होता है, जब बीमारी गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी होती है

जयपुर। अगर आपका बच्चा बैठना या चलना देरी से शुरू करता है, उसके पैरों में हलचल कम होती है या उसे बार-बार निमोनिया हो रहा है तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है क्योंकि चिकित्सकों का मानना है कि ये संकेत एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) के हो सकते हैं। चिकित्सकों के अनुसार, चिंताजनक बात यह है कि अधिकतर अभिभावकों को इसका अंदाजा तब होता है, जब बीमारी गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी होती है।

जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में सात अप्रैल 2025 को मेडिकल जेनेटिक विभाग की स्थापना के बाद मात्र 12 महीने में ही एसएमए के 50 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। एसएमएस अस्पताल के मेडिकल जेनेटिक विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रियांशु माथुर ने कहा कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी अक्सर जन्म के समय दिखाई नहीं देती। बच्चा सामान्य लगता है, लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, उसके पैरों में कमजोरी आने लगती है। धीरे-धीरे पैरों की हलचल कम हो जाती है और बच्चा सामान्य बच्चों की तुलना में समय पर बैठना या चलना शुरू नहीं कर पाता।

उन्होंने कहा कि एसएमए एक आनुवंशिक बीमारी है, जो मांसपेशियों को कमजोर कर देती है। यदि माता-पिता दोनों इस बीमारी के वाहक हैं, तो उनके बच्चे में इस बीमारी के होने का खतरा 25 प्रतिशत तक रहता है, भले ही माता-पिता में कोई लक्षण न हों। चिकित्सक के अनुसार, यदि किसी परिवार में पहले से कोई बच्चा इस बीमारी से पीड़ित है तो भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकना सबसे महत्वपूर्ण है जिसके लिए गर्भधारण से पहले या शुरुआती गर्भावस्था में जेनेटिक टेस्टिंग और परामर्श जरूरी है।

एसएमए का थैरेपी से किया जा रहा उपचार
माथुर ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। अब इस बीमारी का इलाज संभव है और देश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों सहित एसएमएस अस्पताल में इसका उपचार उपलब्ध है। जानकारी के अभाव में कई मरीज उपचार के लिए दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों के चक्कर लगाते हैं। सवाई मानसिंह अस्पताल में जेनेटिक टेस्टिंग और परामर्श की सुविधा उपलब्ध है। इस बीमारी का दवाओं के साथ-साथ जीन थेरेपी जैसी उन्नत तकनीकों से भी उपचार किया जा रहा है। माथुर ने कहा कि विभिन्न भारतीय अध्ययनों के अनुसार, देश में लगभग हर 38 से 44 व्यक्तियों में से एक व्यक्ति एसएमए का वाहक हो सकता है। ऐसे में जागरुकता बेहद जरूरी है। इस बीमारी की समय पर पहचान और सही जानकारी ही इससे लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है।

Location: India, Rajasthan, Jaipur

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