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2013 Muzaffarnagar Riots: रईसुद्दीन हत्या और आगजनी मामले में 22 दोषमुक्त, एफआईआर में 45 आरोपी थे नामित
Published : Feb 8, 2026, 5:23 pm IST
Updated : Feb 8, 2026, 5:23 pm IST
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22 men acquitted in 2013 Muzaffarnagar riots murder case
22 men acquitted in 2013 Muzaffarnagar riots murder case

अपर जिला एवं सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या-4 के पीठासीन अधिकारी कनिष्क कुमार सिंह ने फैसला सुनाया।

 2013 Muzaffarnagar Riots: मुजफ्फरनगर जिले की एक अदालत ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े हत्या, लूट और आगजनी के एक मामले में साक्ष्यों के अभाव में 22 आरोपियों को बरी कर दिया। शासकीय अधिवक्ता ने रविवार को यह जानकारी दी। (22 men acquitted in 2013 Muzaffarnagar riots murder case news in hindi) 

शासकीय अधिवक्ता नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कनिष्क कुमार ने शनिवार को यह कहते हुए आरोपियों को बरी किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।    

उन्होंने बताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने आठ सितंबर 2013 को भौराकला थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर रायसिंह गांव में हुई घटनाओं के संबंध में 26 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की मृत्यु हो गई, जिसके बाद शेष 22 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन कार्रवाई जारी थी।    

अभियोजन पक्ष के अनुसार, हनीफ ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि सैकड़ों दंगाइयों ने गांव में घरों पर हमला किया, संपत्ति लूटी और बाद में घरों में आग लगा दी।    

शिकायत में आरोप था कि हमले के दौरान शिकायतकर्ता के पिता रहीसुद्दीन की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। दंगाइयों पर एक मस्जिद को नुकसान पहुंचाने और एक पुलिस कांस्टेबल की मोटरसाइकिल में आग लगाने का भी आरोप था।

पुलिस ने 45 आरोपियों के विरुद्ध घटना का मुकदमा दर्ज किया था। एसआईटी की ओर से मामले की विवेचना कर 26 आरोपियों के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या-4 में हुई।    

बरी किए गए आरोपियों में अनिल, सुभाष, संजीव, करण, शेर सिंह, ऋषिपाल, हंसपाल, प्रमोद, विक्की, बादल, मदन, जय नारायण, बृजवीर, विनोद, काला, प्रवीण, जगपाल, प्रेमपाल, पप्पू, नीतू, भूरा और हरेंद्र सिंह शामिल हैं। ये सभी मोहम्मदपुर रायसिंह गांव के निवासी हैं।   

13 साल चली इंसाफ की लड़ाई

भौराकलां थाना क्षेत्र का मोहम्मदपुर राय सिंह गांव दंगों से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल था। खेतों में काम कर रहे किसानों पर हमले हुए और गांव में हुई हिंसा की घटनाओं के संबंध में अलग-अलग 15 मुकदमे दर्ज किए गए। इन मामलों में 26 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। इंसाफ की यह कानूनी लड़ाई 13 वर्षों तक चली।

नंगला मंदौड़ पंचायत से लौट रहे लोगों पर हमले के अगले दिन, 8 सितंबर को, गठवाला खाप के अधिकांश गांव दंगों की चपेट में आ गए थे। मोहम्मदपुर राय सिंह गांव भी इनमें शामिल था। हालात बिगड़ने के बाद रातों-रात गांव से अधिकांश मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पलायन कर लिया था।

8 सितंबर को हमलावरों ने मुस्लिम बस्ती पर हमला किया, जिसमें रईसुद्दीन की मौत हो गई थी। गांव से जुड़े सभी मुकदमों की एक साथ सुनवाई हुई, लेकिन अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करार दे दिया।

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