T20 World Cup 2026: टी20 विश्व कप में विदेशी टीमों की तरफ से भाग लेंगे भारतीय मूल के कई क्रिकेटर
T20 World Cup 2026: टी20 विश्व कप में विदेशी टीमों की तरफ से भाग लेंगे भारतीय मूल के कई क्रिकेटर
Published : Feb 3, 2026, 4:33 pm IST
Updated : Feb 3, 2026, 4:33 pm IST
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Around 40 Indian-Origin Players Across Foreign Teams
Around 40 Indian-Origin Players Across Foreign Teams

सात फरवरी से शुरू होने वाले टूर्नामेंट में अपनी ‘घरेलू धरती’ पर प्रभाव छोड़ने के लिए पूरी मेहनत करेंगे।

Indian Origin Cricketers who will play in T20 World Cup 2026: टी20 विश्व कप में कई टीमों में भारतीय मूल के क्रिकेटरों की भरमार है, जो सात फरवरी से शुरू होने वाले टूर्नामेंट में अपनी ‘घरेलू धरती’ पर प्रभाव छोड़ने के लिए पूरी मेहनत करेंगे। विदेशी टीमों में भारतीय मूल के तीन दर्जन से अधिक क्रिकेटर शामिल हैं, जिनमें कनाडा और अमेरिका सबसे आगे हैं।

मुंबई में जन्मे अमेरिकी तेज गेंदबाज सौरभ नेत्रवलकर जैसे खिलाड़ियों के लिए वानखेड़े स्टेडियम में भारत के खिलाफ खेलना एक यादगार अनुभव होगा। जिस देश में उन्होंने जन्म लिया, उसके लिए तो वे खेल नहीं पाए, लेकिन अपने बचपन की इस धरती पर वापसी उनके लिए बेहद भावुक पल साबित होगी।  

फगवाड़ा में जन्मे इटली के तेज गेंदबाज जसप्रीत सिंह भी उस देश में उच्च स्तर की क्रिकेट खेलने को लेकर उत्साहित हैं, जिसे उन्होंने किशोरावस्था में ही छोड़ दिया था। वहीं, नीदरलैंड के ऑफ स्पिनर आर्यन दत्त का जन्म भारत में नहीं हुआ, लेकिन वह भी अपने मूल देश में खेलने के लिए बेहद उत्साहित हैं।

आईसीसी की इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाली 20 टीमों में से कनाडा की टीम में (11) भारतीय मूल के खिलाड़ियों की संख्या सबसे अधिक है। उसके बाद अमेरिका (9), ओमान (7) और यूएई (7) की बारी आती है।   

मेजबान भारत अपनी घरेलू धरती पर खिताब का बचाव करने की कोशिश करेगा लेकिन कई अन्य टीमों में भी ‘भारतीय दबदबा’ देखने को मिलेगा। हम यहां पर भारतीय मूल के कुछ क्रिकेटरों पर नजर डाल रहे हैं जो कि टूर्नामेंट में प्रभाव छोड़ सकते हैं।    

सौरभ नेत्रवलकर: भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट खेल चुके अमेरिका के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज नेत्रवलकर विश्व कप के पहले मैच में भारत का सामना करने के लिए मुंबई पहुंच चुके हैं। उन्होंने पिछले विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन किया था।   

सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने वाले इस 34 वर्षीय खिलाड़ी ने पिछली बार बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था जिससे अमेरिका की टीम ने पाकिस्तान जैसी टीमों को हराकर सुपर आठ के लिए क्वालीफाई किया था।  

नेत्रवलकर भारत की अधिक चुनौतीपूर्ण पिचों पर खेलने के लिए बेताब हैं, लेकिन सात फरवरी को वानखेड़े में मुंबई टीम के अपने पूर्व साथी सूर्यकुमार यादव के खिलाफ मैदान में उतरते समय उन्हें अपनी भावनाओं पर काबू रखने की कोशिश करनी होगी।   

मोनांक पटेल

भारत के खिलाफ टूर्नामेंट के पहले मैच में अमेरिका की कप्तानी आनंद में जन्मे मोनांक पटेल करेंगे, जिन्होंने पिछले विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ मैच विजेता अर्धशतक लगाकर अपनी छाप छोड़ी थी।यह 32 वर्षीय सलामी बल्लेबाज गुजरात अंडर-19 टीम के अपने पूर्व साथी जसप्रीत बुमराह का सामना करने के लिए उत्सुक है। वह मैदान के बाहर अपने बचपन के दिनों को याद कर रहे हैं। बुमराह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में से एक बन गए हैं और मोनांक को किशोरावस्था में ही इसका पता चल गया था।
    

मोनांक ने कहा, ‘‘हमने साथ में लाल गेंद और सफेद गेंद दोनों तरह की क्रिकेट खेली है और वह वाकई बहुत खास पल थे। वह मेरे क्रिकेट करियर का शुरुआती दौर था और तब भी जिस तरह से हम खेल रहे थे, विशेषकर जिस तरह से जसप्रीत प्रदर्शन कर रहा था, हम जानते थे कि उसमें वो खास हुनर ​​है और वह आगे चलकर जरूर बड़ा खिलाड़ी बनेगा।’’
    

जसप्रीत सिंह

इटली के फगवाड़ा में जन्मे जसप्रीत सिंह पर भी लोगों की निगाहें टकी रहेंगी। यह 32 वर्षीय खिलाड़ी 2006 में अपने परिवार के साथ मिलान चला गया था। उन्होंने इटली में टेप-बॉल क्रिकेट से अपने करियर की शुरुआत की और 2016-17 में लाल गेंद की क्रिकेट में कदम रखा और फिर 2019 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।आईसीसी प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिलना उस तेज गेंदबाज के लिए सपने जैसा है, जो कुछ समय पहले तक आजीविका के लिए उबर ड्राइवर के रूप में काम करता था।
     

आर्यन दत्त

आर्यन दत्त को 2023 में वनडे विश्व कप के दौरान भारतीय प्रशंसकों के सामने खेलने का अनुभव है। नीदरलैंड की टीम में भारतीय मूल के एकमात्र क्रिकेटर 22 वर्षीय आर्यन दत्त का लक्ष्य प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करके शीर्ष टीमों को हैरान करना है।दत्त का परिवार 1980 के दशक में पंजाब से नीदरलैंड चला गया था। भारत में अब भी उनके परिवार के कुछ सदस्य रहते हैं।
    

दिलप्रीत बाजवा: गुरदासपुर में जन्में बाजवा 2020 में ही कनाडा गए थे और छह साल बाद वह कनाडा की टीम के कप्तान के रूप में भारत आए हैं। पंजाब में आयु वर्ग की क्रिकेट में ढेरों रन बनाने के बावजूद बाजवा को वह अवसर नहीं मिले जिनकी उन्हें उम्मीद थी।
    

उन्होंने हालांकि निराशा को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और कम प्रतिस्पर्धी माहौल में अपनी क्रिकेट यात्रा जारी रखी। कनाडा ग्लोबल टी20 लीग में मिली सफलता से उन्होंने कनाडा की टीम में जगह बनाई और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यह 23 वर्षीय यह खिलाड़ी 2024 के टी20 विश्व कप में भी कनाडा की टीम का हिस्सा था।
    

जतिंदर सिंह

बाजवा की तरह लुधियाना में जन्मे जतिंदर भी अपने नए देश ओमान की टीम की कप्तानी करेंगे। यह 36 वर्षीय खिलाड़ी एक दशक से अधिक समय से क्रिकेट खेल रहा है, लेकिन उन्हें भारत में खेलने का अवसर कभी नहीं मिला।ओमान के सभी लीग मैच श्रीलंका में होने के कारण जतिंदर के लिए अपनी जन्मभूमि में खेलने का सपना पूरा कर पाना मुश्किल लग रहा है।

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