FPI ने भारतीय बाजार से निकाले 36,000 करोड़ रुपये, एसटीटी से बढ़ा जोखिम
FPI ने भारतीय बाजार से निकाले 36,000 करोड़ रुपये, एसटीटी से बढ़ा जोखिम
Published : Feb 2, 2026, 6:51 pm IST
Updated : Feb 2, 2026, 6:51 pm IST
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FPIs Pull ₹36K Cr from India
FPIs Pull ₹36K Cr from India

एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने जनवरी महीने में भारतीय शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की।     

FPIs Pull ₹36K Cr from India: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली का सिलसिला  जनवरी में भी जारी रहा और उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से करीब 36,000 करोड़ रुपये (लगभग 3.97 अरब डॉलर) की निकासी की।      

इस बीच, वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) खंड में सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने की बजट घोषणा से निकट भविष्य में विदेशी निवेशकों की भागीदारी पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।     

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने जनवरी महीने में भारतीय शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की।     

एफपीआई ने इससे पहले वर्ष 2025 में भी भारतीय बाजार से करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये (18.9 अरब डॉलर) की रिकॉर्ड निकासी की थी। उस समय अस्थिर मुद्रा बाजार, वैश्विक व्यापार तनाव, संभावित अमेरिकी शुल्क और ऊंचे बाजार मूल्यांकन ने विदेशी पूंजी को प्रभावित किया था।     

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के तकनीकी शोध विश्लेषक आकाश शाह ने कहा कि एफएंडओ में एसटीटी का बढ़ना निकट अवधि में खासकर अत्यधिक तेजी और डेरिवेटिव-केंद्रित वैश्विक कोषों के लिए एफपीआई प्रवाह के लिए हल्का नकारात्मक कारक बन सकता है।    

उन्होंने कहा, ‘‘एसटीटी बढ़ोतरी से कर संग्रह बढ़ सकता है, लेकिन इससे सौदों की मात्रा प्रभावित होने और रणनीतिक एफपीआई भागीदारी धीमी होने का जोखिम है। टिकाऊ एफपीआई प्रवाह के लिए निवेशक सिर्फ वृद्धि संभावनाओं के बजाय व्यापक स्थिरता, रुपये की चाल और कर नीति में निरंतरता पर अधिक ध्यान देंगे।’’  

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट भाषण में वायदा पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत तथा विकल्प प्रीमियम एवं विकल्प सौदों पर एसटीटी को क्रमशः 0.10 प्रतिशत एवं 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है।   

एंजेल वन लिमिटेड के वरिष्ठ बुनियादी विश्लेषक वकारजावेद खान ने कहा कि अमेरिका-यूरोप व्यापार तनाव, ग्रीनलैंड विवाद से जुड़ी शुल्क धमकियों, मजबूत डॉलर, ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल, रुपये के 90–92 प्रति डॉलर के स्तर पर आ जाने और बाजार के उच्च मूल्यांकन ने भी जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति बढ़ाई है।     

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख एवं शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि विकसित बाजारों में ऊंची ब्याज दरें, मजबूत डॉलर और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते उभरते बाजारों के प्रति जोखिम लेने की क्षमता घटी है।    

उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर कंपनियों के नतीजों के मिले-जुले रुझान और बजट जैसी प्रमुख घटनाओं को लेकर सतर्कता ने भी विदेशी निवेशकों को सजग बनाए रखा।

(For more news apart from FPIs withdrew ₹36,000 crore from the Indian market in January, with further risks from STT news in hindi, stay tunes to Rozanaspokesman Hindi)

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