सुप्रीम कोर्ट जाने से एक दिन पहले, बुधवार को गीतांजलि अंगमो ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक भावुक तीन-पेज का पत्र भी लिखा था
Sonam Wangchuk News In Hindi: लद्दाख के जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। उनकी पत्नी, गीतांजलि अंगमो ने गुरुवार को संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत कोर्ट में एक रिट याचिका (हेबियस कॉर्पस) दायर कर अपने पति की हिरासत को अवैध और असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी है और तत्काल रिहाई की मांग की है।
सोनम वांगचुक को लद्दाख में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन भड़काने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर राजस्थान की जोधपुर जेल भेज दिया गया है।
#WATCH अपने पति, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से संपर्क करने के लिए क्या उन्हें न्यायिक मदद मिल रही है, इस पर गीतांजलि आंगमो ने कहा, "बिल्कुल नहीं। मुझे केवल एक शीर्ष संस्था के सदस्य का फ़ोन आया कि उन्हें DSP का फ़ोन आया है जिसमें कहा गया है कि कुछ लोग (सोनम वांगचुक) से मिल… https://t.co/wcaxemVUbD pic.twitter.com/iRQ8Va173J
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 3, 2025
राष्ट्रपति मुर्मू को भावुक पत्र
सुप्रीम कोर्ट जाने से एक दिन पहले, बुधवार को गीतांजलि अंगमो ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक भावुक तीन-पेज का पत्र भी लिखा था, जिसमें उन्होंने पति की बिना शर्त रिहाई की मांग की थी।
आदिवासी पृष्ठभूमि का हवाला: अंगमो ने राष्ट्रपति मुर्मू की आदिवासी पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए अपील की कि वह एक आदिवासी होने के नाते लद्दाख के लोगों की भावनाओं और विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि को बेहतर ढंग से समझेंगी।
जासूसी और अज्ञात स्थिति का आरोप: पत्र में उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले चार सालों से लोगों के हितों के लिए काम करने के कारण उनके पति के खिलाफ जासूसी कराई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने पति की मौजूदा स्थिति के बारे में पूरी तरह से कोई जानकारी नहीं है, जो कि नियमों का उल्लंघन है।
लद्दाख पुलिस के 'दुरुपयोग' का आरोप
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) की सीईओ गीतांजलि अंगमो ने केंद्र की कड़ी आलोचना की है और 24 सितंबर की हिंसा के बाद लद्दाख के लोगों के खिलाफ पुलिस अत्याचार का आरोप लगाया है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लद्दाख की वर्तमान स्थिति की तुलना ब्रिटिश भारत के समय से करते हुए लिखा:
"क्या भारत वास्तव में स्वतंत्र है? 1857 में 24,000 अंग्रेजों ने रानी के आदेश पर 300 मिलियन भारतीयों पर अत्याचार करने के लिए 135,000 भारतीय सिपाहियों का इस्तेमाल किया था। आज, एक दर्जन प्रशासक गृह मंत्रालय के आदेश के तहत 3 लाख लद्दाखियों पर अत्याचार और अत्याचार करने के लिए 2400 लद्दाखी पुलिस का दुरुपयोग कर रहे हैं।"
अंगमो ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें अभी तक हिरासत आदेश की प्रति नहीं मिली है और उनके पति को शांतिपूर्ण गांधीवादी प्रदर्शनकारी बताते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन और जनजातीय क्षेत्र के विकास के लिए बोलना किसी भी तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है।
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