राफेल, सुखोई, मिराज, जगुआर और अन्य प्लेटफॉर्म्स ने युद्धक क्षमता और समन्वय का प्रदर्शन किया।
IAF Vayu Shakti 2026: इंडियन एयरफोर्स ने राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में ‘एक्सरसाइज वायुशक्ति’ के जरिए अपनी युद्ध क्षमता का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास में यह भी दिखाया गया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के मिलिट्री ठिकानों, रनवे और रडार को स्ट्राइक कर कैसे नष्ट किया गया। मिसाइलों और लोटरिंग एम्यूनिशन के जरिए ऑपरेशन सिंदूर में सटीक निशाने लगाने की तकनीक को भी इस अभ्यास में प्रदर्शित किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एयरफोर्स चीफ Air Chief Marshal A.P. Singh की मौजूदगी में आयोजित किया गया।
राष्ट्रपति ने ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान

इसके पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एयरफोर्स स्टेशन पर स्वदेशी लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरी। इससे पहले वह 2023 में सुखोई-30 एमकेआई और 2025 में राफेल लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। इस मिशन को दो हेलीकॉप्टरों के गठन में पूरा किया गया, जिसमें राष्ट्रपति ने ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ लीड हेलीकॉप्टर में उड़ान भरी, जबकि एयरफोर्स चीफ एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह और ग्रुप कैप्टन ए. महेंद्र दूसरे हेलीकॉप्टर में नंबर-2 के रूप में शामिल रहे।
राष्ट्रपति ने 25 मिनट की उड़ान में लिया प्रचंड का अनुभव

करीब 25 मिनट की इस उड़ान के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गड़ीसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी और एक टैंक लक्ष्य पर सटीक हमला किया। विज़िटर बुक में राष्ट्रपति ने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा, “भारत में विकसित स्वदेशी लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’में उड़ान मेरे लिए एक समृद्ध अनुभव रही। इस उड़ान ने देश की रक्षा क्षमताओं पर मेरा गर्व और बढ़ा दिया है।”
बेटलफील्ड में परिणाम तय करने का तरीका

एयरफोर्स के इस फायर पावर प्रदर्शन में दिखाया गया कि एयर पावर कैसे सटीक निशाने, उन्नत सेंसर और विभिन्न फोर्स के बीच बेहतर समन्वय के जरिए युद्ध के मैदान में निर्णायक भूमिका निभाती है। इस अभ्यास ने लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता, तेजी से तैनाती और दुश्मन के एयर डिफेंस को नष्ट करने की ताकत का प्रदर्शन किया।
इससे एयरफोर्स ने संदेश दिया कि वह भविष्य के किसी भी खतरे का निर्णायक जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। सीनियर अधिकारियों के अनुसार, ऐसे अभ्यास ऑपरेशनल तैयारी बनाए रखने के साथ ही रणनीति, प्रशिक्षण और तकनीक की प्रभावशीलता को परखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर्स ने दिखाया ऑपरेशन की दक्षता

एक्सरसाइज में विभिन्न फाइटर जेट्स ने नेटोही (रिकॉनिसेंस), सटीक हमले (प्रिसिजन स्ट्राइक), दुश्मन के एयर डिफेंस को दबाने और एयर सुपीरियोरिटी जैसे मिशन अंजाम दिए। राफेल जेट ने सुपरसोनिक रन और एयर डिफेंस इंटरसेप्ट का प्रदर्शन किया और विजुअल रेंज से परे (BVR) स्ट्राइक सहित अपनी मल्टी-रोल क्षमता दिखाई। Su-30MKI ने भारी पारंपरिक बमों का उपयोग करते हुए कमांड-एंड-कंट्रोल ठिकानों पर डीप स्ट्राइक अभ्यास किया।
मिराज और कॉम्बैट हेलीकॉप्टर्स का प्रदर्शन
मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने 450 किलोग्राम बमों के साथ सटीक बमबारी की क्षमता प्रदर्शित की। जगुआर ने अपनी टोही क्षमता दिखाई। इसके अलावा, कॉम्बैट हेलीकॉप्टर्स ने बैटलफील्ड सपोर्ट मिशन का प्रदर्शन किया। ALH Mk-IV रुद्र हेलीकॉप्टर्स ने दुश्मन की बख्तरबंद टुकड़ियों पर रॉकेट हमले किए, जबकि एलसीएच प्रचंड ने दुश्मन के फॉरवर्ड आर्मिंग और रीफ्यूलिंग पॉइंट्स पर स्ट्राइक की।
इन मिशनों ने स्पष्ट कर दिया कि विवादित हवाई क्षेत्र (कॉन्टेस्टेड एयरस्पेस) में अटैक हेलीकॉप्टर्स ग्राउंड फोर्स को कितना प्रभावी समर्थन प्रदान कर सकते हैं।
ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और एयर डिफेंस का प्रदर्शन

एक्सरसाइज में ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ने भी अपनी ऑपरेशनल भूमिका का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। भारतीय सेना की एल-70 एयर डिफेंस गन ने भी कार्रवाई दिखाई, जो ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभा चुकी है। इसके अलावा, चिनूक हेवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर** के माध्यम से M-777 हॉवित्जर को ऑपरेशन एरिया में पहुंचाकर उनकी तैनाती भी प्रदर्शित की गई।
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