ISRO का PSLV-C62 मिशन फेल! तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी के कारण रास्ता भटका, 15 सैटेलाइट प्रभावित
ISRO का PSLV-C62 मिशन फेल! तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी के कारण रास्ता भटका, 15 सैटेलाइट प्रभावित
Published : Jan 12, 2026, 1:29 pm IST
Updated : Jan 12, 2026, 1:29 pm IST
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 ISRO’s PSLV-C62 rocket deviates from flight path
ISRO’s PSLV-C62 rocket deviates from flight path

DRDO द्वारा विकसित गोपनीय 'अन्वेषा' सहित कुल 16 उपग्रह अंतरिक्ष में भटक गए।

ISRO launches PSLV-C62: इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) का साल 2026 का पहला सैटेलाइट मिशन 'PSLV-C62' असफल हो गया है। यह रॉकेट सोमवार सुबह 10:18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से 15 सैटेलाइट लेकर लॉन्च किया गया था। मिशन का उद्देश्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-09 अन्वेषा और 14 सह-यात्री सैटेलाइट्स को 512 किलोमीटर की ऊंचाई पर सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में स्थापित करना था। ISRO के प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि रॉकेट के तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह अपनी निर्धारित मार्ग से भटक गया।

लगभग 8 महीने पहले, 18 मई 2025 को ISRO का PSLV-C61 मिशन भी तकनीकी खराबी के कारण तीसरे चरण में असफल रहा था। इस मिशन का उद्देश्य EOS-09 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को 524 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित करना था। यह ISRO का 101वां लॉन्च मिशन था।

15 सैटेलाइट्स में 7 भारतीय और 8 विदेशी

बता दें लॉन्च किए गए 15 सैटेलाइट्स में से 7 भारतीय थे, जिन्हें हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस ने तैयार किया था, जबकि बाकी 8 सैटेलाइट्स फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूके के थे। यह लॉन्चिंग भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने PSLV मिशन में इतनी बड़ी हिस्सेदारी निभाई। यह मिशन न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) की निगरानी में संचालित हो रहा था। NSIL, ISRO की वाणिज्यिक इकाई है।

PSLV-C62 मिशन के साथ PSLV रॉकेट अपनी 64वीं उड़ान पूरी करने वाला था। अब तक PSLV ने 63 सफल उड़ानें पूरी कर ली हैं और इसे दुनिया के सबसे भरोसेमंद लॉन्च वाहनों में गिना जाता है। इसी रॉकेट से चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे महत्वपूर्ण मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं। PSLV का पिछला मिशन PSLV-C61 था, जो 18 मई 2025 को तकनीकी खराबी के कारण असफल रहा था।

अन्वेषा सैटेलाइट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह उन्नत इमेजिंग क्षमताओं से लैस एक खुफिया (स्पाई) सैटेलाइट है, जिसका उद्देश्य सटीक निगरानी और मैपिंग करना है। यह सैटेलाइट धरती से कई सौ किलोमीटर की ऊंचाई पर होने के बावजूद झाड़ियों, जंगलों या बंकरों में छिपे दुश्मनों की तस्वीरें ले सकता है।

अन्वेषा 'हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग' (HRS) तकनीक पर कार्य करता है, जो रोशनी के अधिक स्पेक्ट्रम को डिटेक्ट करता है। इसका मतलब है कि यह केवल कुछ रंगों की बजाय रोशनी के सैकड़ों बारीक रंगों को पहचान सकता है।

चूंकि यह सैटेलाइट बारीक रंगों को डिटेक्ट करता है, यह यह पता लगाने में सक्षम है कि तस्वीर में असल में क्या है। इसे एक ऐसे स्कैनर की तरह समझा जा सकता है, जो मिट्टी, पौधे, इंसानी गतिविधियों या किसी भी वस्तु को उसकी अलग-अलग चमक के आधार पर पहचान सकता है।

अब तक छह देश HySIS सैटेलाइट लॉन्च कर चुके हैं। भारत के अलावा अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान, इटली और पाकिस्तान ने भी हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट लॉन्च किए हैं। भारत ने इससे पहले 29 नवंबर 2018 को अपनी पहली हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट HySIS लॉन्च की थी, जिसका वजन 380 किलो था और यह 55 स्पेक्ट्रल बैंड्स में रोशनी को डिटेक्ट कर सकता था। अन्वेषा, HySIS का अपग्रेडेड वर्जन है और इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल क्षमता भी अधिक है।

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