लोकतंत्र के लिए चुनाव आयोग का निष्पक्ष रहना बहुत जरूरी: आभा सिन्हा

खबरे |

खबरे |

लोकतंत्र के लिए चुनाव आयोग का निष्पक्ष रहना बहुत जरूरी: आभा सिन्हा
Published : Aug 12, 2023, 3:16 pm IST
Updated : Aug 12, 2023, 3:16 pm IST
SHARE ARTICLE
photo
photo

उन्होंने कहा कि अगर यह बिल कानून बन गया तो चुनाव आयोग स्वतंत्र न होकर सरकारी चुनाव आयोग में तब्दील हो जाएगा।

रांची (संवादाता) : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी की प्रवक्ता आभा सिन्हा ने कहा है कि केंद्र सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल को विनियमित करने के लिए राज्यसभा में जो विधेयक पेश किया है कि अगर यह बिल कानून बन गया तो इससे चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर असर पड़ेगा। लोकतंत्र के लिए चुनाव आयोग का निष्पक्ष रहना बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा कि विधेयक में प्रस्ताव है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और अन्य चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के पैनल की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी, जो देशहित में नहीं है। 

उन्होंने कहा कि अगर यह बिल कानून बन गया तो चुनाव आयोग स्वतंत्र न होकर सरकारी चुनाव आयोग में तब्दील हो जाएगा। लोकतंत्र के इतिहास में संसद में यह एक काला दिन था। चुनाव आयोग भारत में स्वतंत्र और लोकतांत्रिक चुनाव कराने वाली अंतिम स्वतंत्र संस्था है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे मोदी चुनाव आयोग बनाना चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने साफ कहा है कि अगर चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं होगा तो देश में लोकतंत्र कायम नहीं रह सकता। इसलिए, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया गया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश, प्रधान मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल थे, ताकि संतुलन बना रहे।

उन्होंने कहा कि सरकार इस कानून के जरिए सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ के फैसले को रद्द करने की घिनौनी साजिश रच रही है। इस कानून के लागू होने के बाद चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रह पाएगा, क्योंकि अब मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री, उनके एक मंत्री और विपक्ष के नेता द्वारा की जाएगी। यानी दो लोग सरकार से होंगे और एक विपक्ष से और पूर्ण बहुमत के साथ वे जिसे चाहें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त बना सकेंगे। भारत के संविधान में शक्तियों का पृथक्करण है यानी न्यायपालिका और कार्यपालिका एक-दूसरे की शक्ति नहीं छीन सकतीं, लेकिन अब इस कानून के जरिए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जो संतुलन बनाया था उसे खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यदि यह बिल कानून बन जाता है तो इससे चुनाव आयोग की स्वायत्तता और स्वतंत्रता खत्म हो जाएगी और चुनाव आयोग सरकार की कठपुतली बन जायेगा। चुनाव आयोग में सरकार के पसंदीदा लोगों को नियुक्त किया जाएगा। यह बिल और कानून पूरी तरह से अवैध है और इसे अवैध तरीके से राज्यसभा में पेश किया गया ताकि विपक्ष और देश की आवाज नहीं सुनी जा सके।

बिल में प्रस्तावित प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले पैनल पर आपत्ति क्या है?

उन्होंने कहा कि इस बिल के पास होने पर इससे सरकार का अपना मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयुक्त, चुनाव आयोग और नतीजे होंगे। न लोकतंत्र की जरूरत, न सुप्रीम कोर्ट की जरूरत, न संसद की जरूरत, यह लोकतंत्र को बंधक बनाने का कानून है, क्योंकि जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता ही नहीं रहेगी तो लोकतंत्र कैसे बचेगा?

Location: India, Jharkhand, Ranchi

SHARE ARTICLE

ROZANASPOKESMAN

Advertisement

 

दुनिया पर राज करने के लिए कौन सा धर्म सही? Elon Musk के Grok AI का जवाब - सिख धर्म! Sikhism in World

27 Feb 2025 5:33 PM

'हमारा गांव नशे की मंडी बन गया है; चिट्टा, खसखस, अफ़ीम से लेकर मेडीकल नशा तक, जो चाहो ले आओ'

27 Feb 2025 5:31 PM

इन लोगों की जिद ने रोक रखा है नेशनल हाईवे का काम, जब तक मुआवजा नहीं मिलता...

26 Feb 2025 5:56 PM

लुधियाना पश्चिम उपचुनाव के लिए AAP ने घोषित किया उम्मीदवार, राज्यसभा सदस्य संजीव अरोड़ा को दिया टिकट

26 Feb 2025 5:54 PM

ਪੰਥਕ ਇਕੱਠ ਦੌਰਾਨ Sukhbir Singh Badal ‘ਤੇ ਵਰ੍ਹੇ Prem Singh Chandumajra Interview

20 Feb 2025 5:44 PM

एक परिवार की वजह से पूरी कौम का नुकसान हो रहा है, इनके विरुध हो सख्त कार्रवाई , बादल गुट पर बरसे R.P Singh

20 Feb 2025 5:43 PM