अमेरिका के साथ 'जीरो टैरिफ' ट्रेड डील पंजाब की खेतीबाड़ी और किसानों के खिलाफ : धालीवाल 
Published : Feb 3, 2026, 8:17 pm IST
Updated : Feb 3, 2026, 8:17 pm IST
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बलविंदर सिंह धालीवाल
बलविंदर सिंह धालीवाल

धालीवाल बोले- किसानों यूनियनों को इस डील के खिलाफ खड़ा होने की जरूरत

चंडीगढ़ : कांग्रेस के सीनियर नेता और विधायक आईएएस बलविंदर सिंह धालीवाल ने भारत और अमेरिका के बीच हुई बड़ी ‘जीरो टैरिफ’ ट्रेड डील को पंजाब के किसानों और खेतीबाड़ी को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की अर्थव्यवस्था काफी हद तक खेतीबाड़ी पर निर्भर है, जिसमें लाखों लोग गेहूं, चावल, फल और डेयरी जैसी फसलों से अपना गुजरा करते हैं। उन्होंने कहा कि खेतीबाड़ी और किसानों को बचाने के लिए किसान यूनियनों को इस डील के खिलाफ खड़े होने की जरूरत है।

धालीवाल ने कहा कि खेतीबाड़ी सिर्फ़ व्यापार नहीं है, यह पंजाब में खाद्य सुरक्षा और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र बिंदु है। प्रमुख खाद्य पदार्थों, पशु उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य आयात पर टैरिफ कम करने से भारत की खाद्य संप्रभुता और ग्रामीण रोज़गार की रीढ़ दोनों खतरे में पड़ जाएंगी। खेती से ग्रामीण भारत की एक बड़ी आबादी को रोज़गार मिलता है। इसलिए इसे एक संरक्षित क्षेत्र के रूप में माना जाना चाहिए, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में विशेष विचार और छूट दी जानी चाहिए।

इस तरह के समझौते को फाइनल करने से पहले केंद्र सरकार को किसान नेताओं और खेतीबाड़ी माहिरों से राय लेनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने समझौते को अंतिम रूप देने की जल्दबाजी में पंजाब के किसानों के हितों और आजीविका को नज़रअंदाज़ किया है। 

उन्होंने केंद्र सरकार से अपील है कि कोई भी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय व्यापार सौदा भारतीय किसानों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। खोतीबाड़ी को प्रभावित करने वाले किसी भी भविष्य के व्यापार समझौते को तैयार करते समय माहिरों और किसान संगठनों से सलाह ली जानी चाहिए। 

विधायक ने कहा कि पहले ही पंजाब के किसान एमएसपी और अन्य खेती कारणों के चलते गहरी चिंता में हैं। पंजाब के किसान पहले से ही बदलती नीतियों और अपर्याप्त खरीद का खामियाजा भुगत रहे हैं। हम ऐसे किसी और सौदे की इजाज़त नहीं दे सकते जो विदेशी निर्यातकों के पक्ष में हमारे किसान समुदायों के खिलाफ माहौल बनाए। मिलेगा। इस समझौते से अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारतीय बाजारों में अधिक पहुंच मिलेगी। अमेरिका के सस्ते सब्सिडी वाले आयात से स्थानीय किसानों को खतरा बढ़ेगा। जिसका अनुचित फायदा अमेरिकी उत्पादकों को मिलेगा।

धालीवाल ने कहा कि रिपोर्टों और विशेषज्ञ विश्लेषणों ने बार-बार यह बताया है कि डेयरी क्षेत्र को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने से भारतीय छोटे डेयरी किसानों को काफी नुकसान हो सकता है, कुछ अनुमानों के अनुसार यदि डेयरी आयात को उदार बनाया जाता है तो सालाना 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का संभावित नुकसान हो सकता है।

केंद्र सरकार को तुरंत खास सुरक्षा तंत्र की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था की रक्षा करनी चाहिए और संवेदनशील कृषि उत्पादों को टैरिफ उदारीकरण से बाहर रखना चाहिए।

Tags: punjab

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