हालांकि उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में इस वृद्धि के बावजूद भारत के उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित ही रहेगा।
Parliament Budget Session 2026: अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। करीब चार साल में पहली बार क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर के पार पहुंचकर लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।
इसी बीच खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को ईरान द्वारा बंद किए जाने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।
हालांकि पश्चिम एशिया में पैदा हुए इस संकट को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का देश में महंगाई पर असर सीमित रह सकता है। संसद में दिए गए एक लिखित जवाब में उन्होंने कहा कि फिलहाल देश में वस्तुओं की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर हैं, इसलिए क्रूड ऑयल की कीमतों में वृद्धि का महंगाई पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
गौरतलब है कि सोमवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में लगभग 26 प्रतिशत तक उछाल देखा गया। यह तेजी ऐसे समय में आई है जब ईरान ने अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोज्तबा खामनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया है।
एक सप्ताह पहले अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में अयातुल्ला अली खामनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने की धमकी दी, जिसके चलते खाड़ी क्षेत्र के कई बड़े तेल निर्यातक देशों ने सुरक्षा कारणों से अपने शिपमेंट में कटौती करने की घोषणा की है।
मोज्तबा खामनेई को ऐसे समय में ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी नियुक्ति को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। वहीं इजरायल ने भी चेतावनी दी है कि ईरान का जो भी नया नेतृत्व होगा, वह उसके निशाने पर रहेगा।
इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी को तनाव बढ़ने से पहले पिछले एक साल के दौरान इंडियन क्रूड बास्केट की कीमतों में गिरावट का रुख था। उनके अनुसार फरवरी के अंत में इंडियन क्रूड बास्केट की कीमत 69.01 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो 2 मार्च को बढ़कर 80.16 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
हालांकि उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में इस वृद्धि के बावजूद भारत के उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित ही रहेगा।
(For more news apart fom Global crude price rise is unlikely to have a major impact on inflation said Nirmala Sitharaman news in hindi,stay tuned to Rozanaspokesman Hindi)