प्रधानमंत्री ने सोमनाथ के दिव्य माहौल, आस्था और समुद्र तट पर स्थित मंदिर को अपना सौभाग्य बताते हुए इस आयोजन को ऐतिहासिक करार दिया।
PM Modi at Shaurya Yatra: प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर से जुड़े श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग इस अवसर पर हमारे साथ जुड़े हैं। उन्होंने कहा, “यह समय अद्भुत है, और यह वातावरण भी अद्भुत है। एक ओर महादेव का दरबार, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, मंत्रों की गूंज और भक्तों की उपस्थिति इन सबने इस अवसर को दिव्य बना दिया है।” (‘Those who intended to destroy Somnath are confined to history’s pages’: PM Modi news in hindi)
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें यह अपना सौभाग्य लगता है कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उन्हें इस ऐतिहासिक पर्व में सेवा करने का अवसर मिला।
सोमनाथ पहुंचकर पीएम मोदी ने कहा कि मंदिर को नष्ट करने वाले आक्रांता इतिहास के पन्नों में समा गए हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश आज भी कुछ शक्तियां मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध कर रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ-साथ देश के इतिहास, आस्था और आत्मसम्मान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर उन्होंने कहा कि मंदिर को नष्ट करने वाले आक्रांता आज इतिहास के पन्नों में समा चुके हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश आज भी कुछ ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो मंदिरों के पुनर्निर्माण का विरोध करती रही हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर से जुड़े श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग इस अवसर पर हमारे साथ जुड़े हैं। उन्होंने कहा, “यह समय अद्भुत है और यह वातावरण भी अद्भुत है। एक ओर महादेव का महिमामंडित स्वरूप, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, मंत्रों की गूंज और भक्तों की उपस्थिति—इन सबने इस अवसर को दिव्य बना दिया है।”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें यह अपना सौभाग्य लगता है कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उन्हें इस ऐतिहासिक पर्व में सेवा का अवसर मिला।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब वे आज यहां खड़े होकर बात कर रहे हैं, तो उनके मन में बार-बार यह सवाल उठता है कि 1000 साल पहले इसी स्थान पर कैसा माहौल रहा होगा। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने अपनी आस्था और महादेव के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। आक्रांताओं को लगा कि उन्होंने जीत हासिल कर ली है, लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ की ध्वजा पूरी दुनिया को भारत की शक्ति का संदेश देती है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। उन्होंने कहा कि आक्रांताओं ने आते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से खड़ा हुआ। यह धैर्य, संघर्ष और पुनर्निर्माण का उदाहरण दुनिया के इतिहास में बेहद दुर्लभ है।

पीएम मोदी ने कहा कि जो लोग अपने धर्म के प्रति सच्चे होते हैं, वे कभी कट्टरपंथी सोच का समर्थन नहीं करते। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों ने हमेशा ऐसी सोच के आगे झुकना स्वीकार किया। उन्होंने यह भी बताया कि जब आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी उन्हें रोकने की कोशिश की गई। यहां तक कि 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर आगमन पर भी आपत्तियां जताई गई थीं।
पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि आज तलवारों की जगह नए और गुप्त तरीकों से भारत के खिलाफ साजिशें की जा रही हैं। ऐसे में देश को सतर्क, मजबूत और एकजुट रहने की जरूरत है।
PM मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को करीब 30 मिनट तक सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने शिवलिंग पर जल अर्पित किया, फूल चढ़ाए और पंचामृत से अभिषेक किया। बाहर निकलकर उन्होंने पुजारियों और स्थानीय कलाकारों से मुलाकात की और चेंदा वाद्य यंत्र भी बजाया।
इसके पहले करीब 1 किलोमीटर लंबी शौर्य यात्रा में पीएम मोदी ने डमरू बजाया और वीर हमीरजी गोहिल तथा सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमाओं को नमन किया। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार शाम सोमनाथ पहुँचे थे। 1026 में हुए पहले आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ पर पूरे देश में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है, जो भारत की आस्था, संस्कृति और आत्मगौरव का प्रतीक है।
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