विशेषज्ञों ने इसके लिए देश के खराब ड्रेनेज और इंफ्रास्ट्रक्चर को जिम्मेदार ठहराया।
Afghanistan Floods: अफगानिस्तान एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं और कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है। पिछले कुछ दिनों में मौसम ने ऐसा तांडव मचाया कि आम जनता के लिए जीवन कठिन हो गया है। देश के कई इलाकों में भारी बर्फबारी और अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई, जिसमें अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। (Flash floods triggered by heavy rains in Afghanistan kill at least 12 people news in hindi)
अफगानिस्तान नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (ANDMA) के अनुसार, केवल पिछले तीन दिनों में बाढ़ और बर्फबारी ने दर्जनों परिवारों को विस्थापित कर दिया है। अथॉरिटी के प्रवक्ता मोहम्मद यूसुफ हमाद ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा में 12 लोग मारे गए हैं, जबकि 11 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
नुकसान का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि लगभग 274 घर पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं और करीब 1,558 घरों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है. कड़ाके की ठंड के बीच सिर से छत छिन जाने के कारण लोगों के सामने अब अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है.
अफगानिस्तान में बाढ़ और बर्फबारी कोई नई बात नहीं है, लेकिन वहां के आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या प्राकृतिक कारणों से ज्यादा सिस्टम में है। विशेषज्ञों के अनुसार, पानी के नियंत्रण और बाढ़ प्रबंधन के लिए वहां पर्याप्त इंतजाम या मानक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है। यही वजह है कि हर साल नागरिकों को अपनी जान और संपत्ति की कीमत चुकानी पड़ती है।
आर्थिक विश्लेषक कुतुबुद्दीन याकूब का कहना है कि सरकारी सिस्टम में योजना और बजट की भारी कमी है। जब तक प्रबंधन में सुधार नहीं होगा और प्रभावी नीतियां नहीं बनेंगी, आम लोग इसी तरह कठिनाइयों का सामना करते रहेंगे। वहीं, विशेषज्ञ सेयर कुरैशी का मानना है कि ये आपदाएं सिर्फ जान नहीं लेतीं, बल्कि पहले से ही कमजोर स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी तोड़ देती हैं।
अफगानिस्तान इस समय केवल बाढ़ और बर्फबारी से ही नहीं जूझ रहा, बल्कि वहां मानवीय संकट भी गहरा है। नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। उनके अनुसार, एक तरफ पाकिस्तान और ईरान अफगान शरणार्थियों को वापस भेज रहे हैं, तो दूसरी तरफ लंबे सूखे और भूकंप ने हालात और भयानक बना दिए हैं।
संयुक्त राष्ट्र का भी मानना है कि अफगानिस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है जो प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। दशकों से चले आ रहे संघर्ष और धीमी विकास दर ने वहां के लोगों की कठिनाइयों को सहने की क्षमता लगभग समाप्त कर दी है।
फिलहाल, कई प्रांतों में बारिश का सिलसिला जारी है, जिससे आने वाले दिनों में खतरे की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में कमजोर समुदायों को तत्काल राहत और ठोस मदद की सख्त जरूरत है।
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