इस हमले में दो नागरिक घायल हुए हैं।
Iran Attacks On Azerbaijan:‘ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद मध्य पूर्व में जंग लगातार बढ़ती जा रही है, और इस संघर्ष की आग में अब कई देश भी शामिल हो रहे हैं। इस क्रम में नया नाम अजरबैजान का भी जुड़ गया है। खबर है कि ईरान ने अजरबैजान पर ड्रोन हमला किया है। अजरबैजान ने इस घटना पर स्पष्टीकरण के लिए ईरान के राजदूत को तलब किया है।
बता दें कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय अजरबैजान ने पाकिस्तान का समर्थन किया था और इस समर्थन के जरिए इस्लामाबाद के प्रति सहानुभूति जताई थी। अब ईरान ने पाकिस्तान के ही मित्र को इस जंग में निशाना बनाया है।
अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि उसके स्वायत्त क्षेत्र नख्चीवान (Nakhchivan Autonomous Republic) पर ड्रोन हमले ईरान की सीमा से किए गए। मंत्रालय के अनुसार, यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
अजरबैजान सरकार ने इस मामले में तेहरान से कड़ा विरोध दर्ज कराया और स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगते हुए ईरान के राजदूत को तलब किया। बयान में कहा गया है कि ऐसी घटनाएं दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं और क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकती हैं।
तुर्की और अजरबैजान का पाकिस्तान को समर्थन
बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की और अजरबैजान ने पाकिस्तान का खुले तौर पर समर्थन किया था। तुर्की हमेशा से पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है और अजरबैजान के लिए यह एक ब्रिज की तरह काम करता है। दोनों देशों की विदेश नीति में अक्सर वन नेशन-टू स्टेट जैसी सोच देखने को मिलती है। भाषा, संस्कृति और खानपान के मामले में भी दोनों लगभग समान हैं।
पाकिस्तान का अजरबैजान से जुड़ाव विशेष रूप से कोविड के दौर में मजबूत हुआ, जब साल 2020 में अजरबैजान ने आर्मेनिया के खिलाफ युद्ध छेड़ा। उस समय इस्लामाबाद ने खुलकर अजरबैजान के पक्ष में समर्थन दिया और सैन्य सहायता देने के वादे भी किए। इससे दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत हुए।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अजरबैजान ने पाकिस्तान के प्रति अपनी सहानुभूति और समर्थन जाहिर किया। पाकिस्तान में अजरबैजान के राजदूत खजर फरहादोव ने कहा था कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का पूरी तरह समर्थन करता है। उन्होंने रिपब्लिक ऑफ अजरबैजान की स्वतंत्रता की 30वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही और कहा, "अजरबैजान यूएन के प्रस्तावों के अनुसार कश्मीर मुद्दे पर पूरी तरह से पाकिस्तान के साथ है।"
पाकिस्तान का अजरबैजान को समर्थन जारी
पाकिस्तान ने अजरबैजान की अखंडता से संबंधित सभी मामलों में खुले तौर पर समर्थन किया है और वह पहला देश था जिसने अजरबैजान को मान्यता दी। अजरबैजान के राजदूत ने इस दौरान तुर्की, पाकिस्तान और अजरबैजान के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर भी चर्चा की।
इस कार्यक्रम में नेशनल असेंबली के अध्यक्ष असद कैसर, तुर्की और यूरोपीय संघ के कई विदेशी राजदूत शामिल हुए। समारोह में पाकिस्तान और अजरबैजान के झंडों से सजा केक काटा गया।
वहीं, पाकिस्तान का अजरबैजान की जमीन का इस्तेमाल भारत-विरोधी गतिविधियों में होता रहा है। पाकिस्तान और तुर्की ने अजरबैजान में एक सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें भारत के खिलाफ खालिस्तान की मांग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिश की गई थी।
16 जनवरी 2026 को बाकू में "भारत में सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ नस्लवाद और हिंसा: जमीन पर हकीकत" नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसे अजरबैजान सरकार से जुड़े बाकू इनिशिएटिव ग्रुप (BIG) ने आयोजित किया। सम्मेलन में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा भी शामिल हुए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि इसके पीछे सरकारी समर्थन मौजूद है।
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