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बिहार और झारखंड के बीच 53 साल पुराना विवाद सुलझा
Published : Jan 13, 2026, 9:45 pm IST
Updated : Jan 13, 2026, 9:45 pm IST
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

अविभाजित बिहार के हिस्से के 7.75 मिलियन एकड़ फीट जल में से 5.75 MAF जल बिहार को और 2 मिलियन एकड़ फीट जल झारखंड को मिलेगा

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक हुई जिसमें कुल ४३एजेंडों पर निर्णय लिया गया। बिहार में ५३ वर्षों से लंबित पड़े इंद्रपुरी जलाशय योजना पर झारखंड के साथ समझौते के बाद निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इस परियोजना को फिर से शुरू करने को लेकरहुई कैबिनेट की बैठक में मुहर लग गई।  यह जानकारी कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सूचना भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में विस्तृतदेते हुए कही। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो गया, जिससे भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, पटना, गया और अरवल जिले में समुचित सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। 

गौरतलब है कि पिछले वर्ष 10 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में रांची में हुई पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक में बिहार के उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस मामले में बिहार का पक्ष मजबूती के साथ रखा था। बिहार और झारखंड के बीच वर्षों से लंबित सोन नदी से जुड़े इस जल बंटवारा को सुलझाया गया।

दोनों राज्यों के बीच यह सहमति बनी कि अविभाजित बिहार के हिस्से के 7.75 मिलियन एकड़ फीट जल में से 5.75 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) जल बिहार को और 2 मिलियन एकड़ फीट जल झारखंड को मिलेगा। बिहार और झारखंड के बीच इस पर एकरारनामा होने के बाद मंत्रिपरिषद के स्तर पर स्वीकृति प्रदान की गई। 

वर्ष 1973 में बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच हुए वाणसागर समझौते के अनुसार अविभाजित बिहार को 7.75 एमएफए जल आवंटित था। वर्ष 2000 में बिहार और झारखंड का बंटवारा होने के बाद झारखंड की तरफ से दोनों राज्य के बीच सोन नदी के जल का बंटवारा किए जाने की मांग लगातार उठाई जाती रही है। इस वजह से बिहार की इंद्रपुरी जलाशय परियोजना पर सहमति नहीं दी जा रही थी। बिहार की तरफ से बंटवारे के लिए फॉर्मूला दिया गया था, बावजूद इसके मामले का समाधान नहीं हो पा रहा था। 

उन्होंने ने कहा कि राज्य की 53 काराओं या जेलों में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन जेलों में 9 हजार 73 कैमरे लगाने की अनुमति कैबिनेट के स्तर पर दी गई। इसके लिए 155 करोड़ 38 लाख 36 हजार 153 रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई। ये कैमरे बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से लगाए जाएंगे। इस आवंटित राशि में कैमरों की खरीद के साथ ही जेलों में संबंधित सॉफ्टवेयर, फिल्ड आधारभूत संरचना, फाइबर नेटवर्क, कारा स्तर पर अनुश्रवण प्रणाली और मानव बल समेत अन्य पर आने वाले खर्च भी शामिल हैं। इसके अलावा 8 जेलों में पहले से लगे सीसीटीवी कैमरों के एकीकरण से संबंधित कार्य भी बेल्ट्रॉन को करना है। इस नेटवर्क के तैयार हो जाने से सभी जेलों की मॉनीटरिंग ऑनलाइन हो सकेगी।

दरभंगा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के पास लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो हब बनाया जाएगा। इसके लिए 50 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस पर 138 करोड़ 82 लाख 88 हजार रुपये का खर्च आएगा, जिसकी स्वीकृति कैबिनेट से मिल गई है। इस एयरपोर्ट के पास लॉजिस्टिक पार्क एवं कार्गों हब का निर्माण होने से मिथिला एवं उत्तर बिहार के कृषि आधारित, उत्पादों के एयर कार्गों परिवहन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा आर्थिक विकास एवं समग्र समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। इसके निर्माण से एयरो सिटी जैसी वाणिज्यिक सुविधाओं के विकास से रोजगार के नए अवसर बनेंगे, जिससे पूर्वी बिहार के समग्र विकास को गति मिलेगी।

इसके अलावा बेगूसराय स्थित मेसर्स प्रिंस पाईप्स एंड फीटिंग लिमिटेड को बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली- 2016 के अंतर्गत 46 हजार एमटीपीए का पाईप्स एंड फिटिंग निर्माण इकाई की स्थापना के लिए 199 करोड़ 44 लाख रुपये की निजी पूंजी निवेश की स्वीकृति दी गई है। इससे 225 कुशल एवं अकुशल कामगारों को रोजगार मिल सकेगा। वहीं, वैशाली में मेसर्स लॉजीपार्क पटना प्राइवेट लिमिटेड में 5 लाख 59 हजार 372 वर्गफीट क्षमता का लॉजिस्टिक पार्क या वेयरहाउसिंग इकाई की स्थापना के लिए 100 करोड़ 4 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे 500 कामगारों को रोजगार मिल सकेगा। रोहतास के बंजारी स्थित मेसर्स रोहतास सीमेंट (डालमिया सीमेंट लिमिटेड की इकाई) की फैक्ट्री का विस्तार कर 1.5 मिलियन टीपीडी करने के लिए 107 करोड़ 32 लाख रुपये के निजी पूंजी निवेश की स्वीकृति दी गई है। इससे 594 कामगारों को रोजगार मिल सकेगा।

उन्होंने ने कहा कि साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के माध्यम से 13 प्रमंडलों में भूमिगत केबलिंग और इससे जुड़े कमांड सेंटर का कार्य करने के लिए 576 करोड़ रुपये के योजना की स्वीकृति दी गई है। यह कार्य 60 और 40 के अनुपात में किया जाएगा। यानी 346 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से अनुदान के तौर पर मिलेंगे। जबकि, 230 करोड़ रुपये राज्य सरकार के स्तर से मुहैया कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त पेसू के शेष चार प्रमंडलों दानापुर, खगौल, गुलगारबाग और कंकड़बाग-2 में इस कार्य को करने के लिए अलग से स्वीकृति प्रदान की गई है। 

इसके अतिरिक्त पटना रिंग रोड निर्माण के तहत एनएच 131जी के कन्हौली-शेरपुर (8.48 किमी) के बीच छह लेन सड़क के साथ बिहटा-दानापुर एलिवेटेड कॉरिडोर का जंक्शन विकसित करने के लिए 11 राजस्व गांवों में जमीन का अधिग्रहन किया जाएगा। इसका रकवा 185 एकड़ है और इस पर 284 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें 50 फीसदी राज्यांश राशि के तौर पर 142 करोड़ रुपये व्यय की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इसका निर्माण भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है।

Tags: bihar

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