दिल्ली दंगे मामले में शरजील 28 जनवरी, 2020 से जेल में है।
2020 Delhi Riots Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, 5 अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के पालन के साथ जमानत दे दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उमर और शरजील अगले एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका नहीं दाखिल कर सकते। (Court Verdict On Bail Plea Of Umar Khalid In Delhi Riots Case news in hindi)
उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद दिल्ली दंगों के आरोप में 5 साल 3 महीने से तिहाड़ जेल में बंद थे। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में उन्हें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि "अनुच्छेद 21 संवैधानिक व्यवस्था में विशेष महत्व रखता है। ट्रायल से पहले जेल में रहना सजा नहीं माना जा सकता और किसी की स्वतंत्रता से वंचित करना मनमाना नहीं होना चाहिए। UAPA एक विशेष कानून है, जो यह स्पष्ट करता है कि ट्रायल से पहले जमानत किन शर्तों पर दी जा सकती है।"
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि सभी अपीलकर्ता अपराध के मामले में समान स्थिति में नहीं हैं। अदालत को प्रत्येक आवेदन की भागीदारी और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग मूल्यांकन करना होगा। अनुच्छेद 21 के तहत राज्य को ट्रायल से पहले लंबी हिरासत को न्यायसंगत ठहराना होगा।"
शरजील इमाम और उमर खालिद ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 2020 के दिल्ली दंगों में कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामलों में सख्त गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था।
पुलिस के मुताबिक, दंगे अचानक नहीं हुए थे, बल्कि यह पूरा देश स्तर पर (पैन-इंडिया) रची गई साजिश का हिस्सा थे, जिनका उद्देश्य ‘सत्ता परिवर्तन’ और ‘आर्थिक दबाव’ बनाना था। पुलिस ने कहा कि CAA को 'शांतिपूर्ण विरोध' के नाम पर कट्टरपंथी गतिविधियों का माध्यम बनाया गया।
दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया कि साजिश को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान अंजाम देने की योजना बनाई गई थी, ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भारत की ओर खिंचा जा सके और CAA के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उजागर किया जा सके।
पुलिस ने बताया कि इस साजिश को देशभर में दोहराने की कोशिश की गई, जिसके लिए कई व्हाट्सएप ग्रुप्स, दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) और जामिया अवेयरनेस कैंपेन टीम का उल्लेख किया गया।
2020 दिल्ली दंगे केस क्या है?
24 फरवरी 2020 को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के दौरान, उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुईं। ये दंगे कई दिनों तक जारी रहे, जिनमें 50 से ज्यादा लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हुए।
इस मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित करीब बीस लोगों पर दंगे भड़काने की साजिश में कथित रूप से शामिल होने का आरोप लगाया गया है।
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