सूत्रों के मुताबिक, वह बजट सत्र के दूसरे चरण में तब तक लोकसभा नहीं आएंगे, जब तक प्रस्ताव पर चर्चा और फैसला नहीं हो जाता।
Parliament Budget Session 2026: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला होने तक सदन की कार्यवाही में हिस्सा न लेने का निर्णय किया है। सूत्रों के अनुसार, जब तक उनके पद से हटाने के प्रस्ताव पर सदन में चर्चा और मतदान नहीं हो जाता, तब तक वह लोकसभा नहीं आएंगे। (Speaker Om Birla Abstains From Attending Parliament Till There Is An Outcome news in hindi )
हालांकि संसदीय नियमों में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है, फिर भी ओम बिरला ने स्वेच्छा से यह फैसला लिया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि सरकार या विपक्ष की ओर से उन्हें मनाने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि प्रस्ताव पर निर्णय होने तक वह सदन में उपस्थित नहीं होंगे।
जानकारी के अनुसार, बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन, यानी 9 मार्च को लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। नियमों के तहत इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए सदन में कम से कम 50 सांसदों को खड़े होकर समर्थन जताना होगा। इसके बाद ही पीठासीन अधिकारी प्रस्ताव पर औपचारिक चर्चा की अनुमति देंगे।
उच्च सूत्रों का कहना है कि यदि आवश्यक समर्थन मिल जाता है, तो उसी दिन लोकसभा में ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कराई जा सकती है।
ओम बिरला पर कांग्रेस का पक्षपात का आरोप
कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है। यह नोटिस लोकसभा के सचिव जनरल को दिया गया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि स्पीकर ओम बिरला सदन की कार्यवाही पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित कर रहे हैं और कई अवसरों पर विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं दिया गया, जबकि यह संसद में उनका मूल लोकतांत्रिक अधिकार है।
कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके अलावा, नोटिस में आठ सांसदों के निलंबन का मुद्दा भी उठाया गया है।
राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव पर नहीं किए हस्ताक्षर
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि मंगलवार को दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर नियम 94C के तहत लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा गया। इस बीच एक अहम जानकारी सामने आई है कि कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। पार्टी का कहना है कि संसदीय लोकतंत्र में नेता प्रतिपक्ष द्वारा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं माना जाता।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), समाजवादी पार्टी (सपा) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सहित कुल 118 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए हैं। कांग्रेस द्वारा सौंपे गए नोटिस में कहा गया है कि यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के प्रावधानों के तहत लाया गया है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष द्वारा सौंपे गए इस नोटिस की जांच करने के निर्देश लोकसभा के सचिव जनरल उत्पल कुमार सिंह को दे दिए हैं।
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