A massive fire in a chemical factory in Rajasthan's Bhiwadi killed at least eight workers news in hindi
Rajasthan Factory Blast News: राजस्थान के भिवाड़ी में सोमवार सुबह एक केमिकल फैक्ट्री में भयंकर आग लग गई। करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल टीम ने आग पर काबू पाया। इस हादसे में आठ लोग झुलस गए। भिवाड़ी में प्रशासन की नाक के नीचे यह जानलेवा कारखाना चल रहा था, जहां बिना रजिस्ट्रेशन और सरकारी अनुमति के बारूद से पटाखे बनाए जा रहे थे। सोमवार को जब धमाका हुआ और आधा दर्जन से अधिक मजदूर इसकी चपेट में आए, तो कई की मौत हो गई, जिससे प्रशासन की आंखें खुल गईं।
भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक इलाके में हुई इस घटना ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोपहर 1 बजे तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी, जबकि आशंका जताई जा रही है कि दो मजदूर अभी भी फैक्ट्री के अंदर फंसे हो सकते हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के दौरान 3–4 बार जोरदार धमाके हुए, जिनकी आवाज दूर-दूर तक सुनी गई और लोगों में डर का माहौल पैदा हो गया। एहतियात के तौर पर आसपास की फैक्ट्रियों को खाली कराया गया और बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी गई, ताकि नुकसान और न बढ़े।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे। करीब आधा दर्जन दमकल गाड़ियों ने घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि आग बुझाने का काम लंबे समय तक जारी रहा। औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट नंबर G-1, 118 में स्थित यह फैक्ट्री पिछले कई महीनों से बंद बताई जा रही थी। दमकल प्रभारी राजू खान ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे फैक्ट्री के अंदर धुआं उठता दिखाई दिया और थोड़ी ही देर में आग भड़क गई।
भिवाड़ी के केमिकल फैक्ट्री हादसे में प्रशासन पर सवाल
एडीएम सुमित्रा मिश्रा ने बताया कि गश्त पर मौजूद पुलिस टीम ने सबसे पहले फैक्ट्री में आग देखी और तुरंत दमकल बुलाई। अब तक सात मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं। सभी मृतक मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के बताए जा रहे हैं। वहीं, दो और लोग अभी भी फैक्ट्री में फंसे होने की आशंका के बीच सर्च ऑपरेशन जारी है।
इस घटना ने प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। औद्योगिक क्षेत्र में महीनों से बंद बताई जा रही फैक्ट्री में अवैध गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो गई है। अलवर जिला कलेक्टर और खैरथल जिले की कार्यवाहक जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला जब मौके पर पहुंचीं, तो लोगों ने उनके सामने प्रशासन की अनदेखी के आरोप लगाए और सवाल किया कि प्रशासन की निगरानी में कैसे अवैध पटाखा फैक्ट्री चल रही थी।
पटाखा फैक्ट्री चलाने के लिए लाइसेंस अनिवार्य, उल्लंघन पर भारी जुर्माना और जेल
बिना लाइसेंस पटाखों का निर्माण, भंडारण या बिक्री करना गैरकानूनी है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। सरकार केवल औद्योगिक क्षेत्रों में ही फैक्ट्री स्थापित करने की अनुमति देती है। इसके लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से एनओसी (NOC) लेना अनिवार्य होता है। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, फायर विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भी इस प्रक्रिया में भूमिका होती है।
पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री के लिए अलग-अलग लाइसेंस आवश्यक होते हैं। बिना लाइसेंस फैक्ट्री चलाने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, फैक्ट्री सील की जा सकती है, और जिम्मेदारों की गिरफ्तारी या जेल की सजा भी हो सकती है। अब यह देखना होगा कि इस मामले में सरकार कितनी सख्ती से कार्रवाई करती है।
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