'दो गुजराती कारोपरेट घरानों को खुश करने के लिए मनरेगा को खत्म करने पर तुली है केंद्र सरकार' : परगट सिंह
'दो गुजराती कारोपरेट घरानों को खुश करने के लिए MGNREGA को खत्म करने पर तुली है केंद्र सरकार' : परगट सिंह
Published : Dec 28, 2025, 4:21 pm IST
Updated : Dec 28, 2025, 4:23 pm IST
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The central government is determined to abolish MNREGA to please two Gujarati corporate houses: Pargat Singh
The central government is determined to abolish MNREGA to please two Gujarati corporate houses: Pargat Singh

पंजाब सरकार भी मनरेगा लागू करने में नाकाम, औसतन 50 दिन ही दे पाई रोजगार

Chandigarh News: पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की 21 साल पुरानी विजिनरी स्कीम मनरेगा को केंद्र की भाजपा सरकार सिर्फ दो गुजराती कारपोरेट घरानों को खुश करने के लिए खत्म करना चाहती है। दो गुजराती देश को बेचने में लगे हैं और दो गुजराती कारपोरेट खरीदने में। केंद्र पहले ही युवाओं को रोजगार नहीं दे पा रही है और अब 12 करोड़ लोगों को मिल रही 100 दिन रोजगार की गारंटी भी छीन रही है। इस स्कीम को पंजाब सरकार भी लागू करने में नाकाम साबित हुई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब सरकार अपने कार्यकाल के दौरान सिर्फ औसतन 50 दिन ही रोजगार दे पाई है, जबकि इस साल 2025 में 38 फीसदी टारगेट ही एचीव किया जा सका है। 

उन्होंने कहा कि जी –रामजी स्कीम के तहत 40 फीसदी राज्यों की भागदारी करने से राज्यों पर 30 से 50 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। केंद्र सरकार राज्यों से टैक्स क्लैक्शन पूरी ले रही है, लेकिन अब उनकी भागीदारी बढ़ा रही है, जोकि सरासर गलत फैसला है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार पहले ही 4.17 लाख करोड़ रुपए के कर्ज में दबी है। इन दिनों आप सरकार के पास वेतन देने तक का पैसा नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार स्कीम को कैसे चला पाएगी।

उन्होंने कहा कि अब तक तो पंजाब सरकार को दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करना चाहिए था। लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान सिर्फ एक दिन का स्पेशल सैशन रखकर बाकी मुद्दों को ही खत्म करने की कोशिश में है। उनको रेगुलर सैशन बुलाना चाहिए, ताकि मनरेगा जैसे अतिजरूरी मुद्दे के अलावा कानून व्यवस्था व अन्य मुद्दों पर भी विचार हो। आनंदपुर साहिब में भी सैशन बुलाकर 65 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए, जिसका कोई मतलब नहीं था।

परगट सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को पूरी तरह कारपोरेट बना दिया है। यह फैसला सिर्फ कारपोरेट को सस्ती लेबर दिलाने के लिए किया जा रहा है। क्योंकि कोविड के दौरान लाखों की तदाद में लेबर अपनी घरों में गई, लेकिन लौटी नहीं। उनको उनके राज्यों में ही मनरेगा में काम मिल गया। जिससे कारपोरेट को लेबर नहीं मिल पा रही थी। आने वाले समय में केंद्र सरकार राइट टू फूड एक्ट भी उसी तरफ ले जाकर खत्म करने जा रही है। सरकार ने एफसीआई को अनबंडलिंग करने का काम शुरू कर दिया है।

पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने किसान जत्थेबंदियों से अपील की है कि वह भी मजदूरों के साथ खड़ी हों। किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली में किसान-मजदूर एकता का सांझा नारा लगाया गया था, अब समय आ गया है कि किसान मजदूरों के साथ खड़े हों। केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। हर संभव प्रयास करके मनरेगा को बचाया जाएगा। जिसके लिए गांव-गांव, गली-गली तक कांग्रेस वर्कर लड़ाई लडेंगे और आवाज बुलंद करेंगे। इसे जनमुहिम बनाया जाएगा।

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