Himachal Pradesh: शिमला के जुन्गा महल में भीषण आग, सदियों पुरानी नक्काशी और विरासत हुई राख
Himachal Pradesh: शिमला के जुन्गा महल में भीषण आग, सदियों पुरानी नक्काशी और विरासत हुई राख
Published : Jan 8, 2026, 3:54 pm IST
Updated : Jan 8, 2026, 3:54 pm IST
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A massive fire breaks out at Junga Palace in Shimla
A massive fire breaks out at Junga Palace in Shimla

इस महल का निर्माण 1800 के दशक में तत्कालीन क्योंथल रियासत के शासकों ने करवाया था।

Himachal Pradesh: शिमला से लगभग 26 किलोमीटर दूर जुन्गा में स्थित 200 साल पुराना ऐतिहासिक महल बुधवार को भीषण आग की चपेट में आकर नष्ट हो गया। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। दोपहर करीब 1 बजे भड़की इस आग ने कुछ ही समय में पूरे महल को अपने घेरे में ले लिया। (A massive fire breaks out at Junga Palace in Shimla news in hindi)

आग लगने के सटीक कारण और इस घटना में हुए नुकसान का अभी पता लगाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इस महल का निर्माण 1800 के दशक में तत्कालीन क्योंथल रियासत के शासकों ने करवाया था।

हरी-भरी पहाड़ियों और शांत वादियों के बीच बसा जुन्गा अपनी ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत के लिए जाना जाता है। यहां का प्राचीन महल पहाड़ी वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है, जिसे इसकी लकड़ी की बारीक नक्काशी और पारंपरिक निर्माण शैली से पहचाना जाता है। हालांकि, लंबे समय तक उचित संरक्षण और देखरेख के अभाव में यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे जर्जर हो गई और अब उपयोग से बाहर हो चुकी थी।

इसी पुराने महल के समीप 'चौरनी पैलेस' नामक नया महल स्थित है, जिसे वर्तमान में शाही परिवार का निवास और उनकी गतिविधियों का केंद्र माना जाता है। जुन्गा, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से मात्र 26 किलोमीटर दूर स्थित, एक शांत और ऐतिहासिक कस्बा है। यह स्थान पूर्व में प्रसिद्ध क्यौंथल रियासत की राजधानी हुआ करता था। इसका नाम स्थानीय देवता 'जून का' के नाम पर पड़ा है, जो आज भी यहां की संस्कृति और आस्था का केंद्र हैं।

यह महल पत्थर, लकड़ी और मिट्टी के मेल से बना है। इसकी छतों पर स्लेट (पत्थर की टाइलें) का प्रयोग किया गया है, जो पहाड़ी वास्तुकला की विशिष्टता को दर्शाता है। महल के लकड़ी के दरवाजों और खंभों पर की गई बारीक नक्काशी उस दौर के कलाकारों की कुशलता का प्रमाण है, जब मशीनों का उपयोग नहीं होता था।

यहां एक ही पेड़ के तने को काटकर बनाई गई सीढ़ियां भी देखी जा सकती हैं, जिसे पहाड़ी भाषा में 'लिस्का' के रूप में जाना जाता है। यह प्राचीन इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण है। वर्तमान में यह महल एक जीवित संग्रहालय जैसा प्रतीत होता है, जहां पुराने कैलेंडर, मूर्तियां और अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं आज भी उस दौर की याद दिलाती हैं।

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