अदालतें आपराधिक मामलों में कुछ आरोपितों को बचाने के लिए टुकड़ों में किए गए समझौतों को स्वीकार नहीं कर सकतीं

खबरे |

खबरे |

अदालतें आपराधिक मामलों में कुछ आरोपितों को बचाने के लिए टुकड़ों में किए गए समझौतों को स्वीकार नहीं कर सकतीं
Published : Nov 13, 2024, 6:09 pm IST
Updated : Nov 13, 2024, 6:09 pm IST
SHARE ARTICLE
Punjab and Haryana High Court Today News In Hindi
Punjab and Haryana High Court Today News In Hindi

दिशा-निर्देशों के अनुसार हाई कोर्ट को टुकड़ों में समझौते के आदेश देने में आत्म-संयम बरतने की आवश्यकता है।  

Punjab and Haryana High Court Today News In Hindi: एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ कर दिया कि  अदालतें आपराधिक मामलों में कुछ आरोपितों  को बचाने के लिए टुकड़ों में किए गए समझौतों को स्वीकार नहीं कर सकतीं .

जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस  सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि सभी आरोपितों  पर संयुक्त रूप से मुकदमा चलाया जाना चाहिए।खंडपीठ ने कहा कि  शिकायतकर्ता या पीड़ित और कुछ आरोपितों  के बीच टुकड़ों में किया गया समझौता दंड प्रक्रिया संहिता  के विपरीत होगा, जिसे अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता  द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है।

 हाई कोर्ट ने यह भी  निष्कर्ष निकाला कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि पीड़ित/शिकायतकर्ता, टुकड़ों में समझौते करके आपराधिक न्याय प्रणाली का संचालक न बन जाए, न्यायालयों को  ऐसे  समझौते को स्वीकार नहीं करना चाहिए। पीठ समन्वय पीठ द्वारा इस प्रश्न पर किए गए संदर्भ का उत्तर दे रही थी कि क्या किसी आपराधिक मामले में आंशिक समझौता स्वीकार किया जा सकता है, यह देखते हुए कि इसका अन्य अभियुक्तों के मुकदमे पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। 

कोर्ट ने पाया कि अतीत में विभिन्न एकल जज  द्वारा टुकड़ों में समझौते को स्वीकार करना प्रथम दृष्टया पक्षों के बीच समझौते के बाद मामलों को रद्द करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के  खिलाफ है। 

दिशा-निर्देशों के अनुसार हाई कोर्ट को टुकड़ों में समझौते के आदेश देने में आत्म-संयम बरतने की आवश्यकता है।  हाई कोर्ट ने कहा कि  अपराधों के आंशिक समझौता आदेश का सामना करने पर पीड़ित पक्ष स्वयं शक्तिहीन हो सकता है।यदि मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता या पीड़ित समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार करता है, तो समझौता आदेश का उल्लंघन हो सकता है।ऐसे मामले में  जिन आरोपितों  के साथ समझौता नहीं हुआ, वे तर्क दे सकते हैं कि शेष मुकदमा केवल उनके खिलाफ प्रतिशोध लेने  के लिए चलाया जा रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि मुख्य आरोपित  के साथ ऐसा समझौता किया जाता है, तो सरकारी अभियोजक मामले में संयुक्त आपराधिक दायित्व साबित करने में अक्षम हो सकता है। हाई कोर्ट ने कहा कि  इसकी मार आपराधिक प्रशासन प्रणाली पर पड़ेगी, इसके अलावा पीड़ित/शिकायतकर्ता भी इसकी मार झेलेगा।

(For more news apart from Punjab and Haryana High Court Today News In Hindi, stay tuned to Spokesman Hindi)

 

SHARE ARTICLE

ROZANASPOKESMAN

Advertisement

 

आमरण अनशन समाप्त करने के बाद जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा, हमारी किसी संगठन से कोई लड़ाई नहीं है

06 Apr 2025 6:14 PM

बठिंडा में बर्खास्त महिला कांस्टेबल का मामला, महिला कांस्टेबल की 2 दिन की रिमांड खत्म

06 Apr 2025 6:08 PM

चिट्टे के साथ पकड़ी गई बर्खास्त महिला कांस्टेबल मामले में बड़ा अपडेट, देखें Live

05 Apr 2025 5:09 PM

एक और पादरी पर रेप और हत्या के गंभीर आरोप, बजिंदर के बाद इस पादरी पर हुआ बड़ा खुलासा!

05 Apr 2025 5:07 PM

Air Force Pilot Siddharth का हुआ अंतिम संस्कार, मां ने नम आंखों से दी शहीद बेटे को अंतिम विदाई

05 Apr 2025 5:05 PM

Punjab Latest Top News Today | देखों खास खबरें | Spokesman TV | LIVE

04 Apr 2025 7:00 PM